{"title":"Education","description":"\u003ch6\u003e\u003ci\u003eA comprehensive collection of Hindi books on education, pedagogy, educational development, and teaching practices in India.\u003c\/i\u003e\u003c\/h6\u003e","products":[{"product_id":"bachchon-ko-aise-karein-jagruk","title":"Bachchon Ko Aise Karein Jagruk","description":"\u003cp\u003eबच्चा एक सफल व्यक्ति बने, जीवन के हर क्षेत्र में नाम कमाये और अपने सपनों को साकार करे, दुनिया के सभी माता-पिता की यही अभिलाषा होती है। उन्हीं अभिभावकों तथा माता-पिता के बच्चे जीवन में उन्नति करते हैं जो बच्चों को हमेशा सकारात्मक सोचने के लिए प्रेरित करते हैं और उनकी शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान देते हैं। लेकिन इसके लिए माता-पिता को भी बहुत परिश्रम करने की जरूरत होती है। अत: अभिभावकों तथा माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को अच्छे दिशा-निर्देश देने के तरीके ढूढ़ें। ऐसे दिशा-निर्देशों को इस पुस्तक में सम्मिलित किया गया है जिससे बच्चे जीवन में उन्नति कर अपना भविष्य संवार सकें।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45049236259006,"sku":null,"price":360.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bachchonkoaisekareinjagruk.jpg?v=1745651429"},{"product_id":"adhyapakon-ki-shiksha","title":"Adhyapakon Ki Shiksha","description":"\u003cp\u003eAuthor : G.K. Hodenfied\u003c\/p\u003e\n\u003cp class=\"MsoNormal\" style=\"mso-margin-bottom-alt: auto; line-height: 15.45pt; mso-outline-level: 1; background: white;\"\u003e \u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45104858661054,"sku":null,"price":476.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/AdhyapakonKiShiksha.jpg?v=1748082061"},{"product_id":"shiksha-kaisi-ho","title":"Shiksha Kaisi Ho","description":"\u003cp\u003eशिक्षा का लक्ष्य विद्यार्थियों के अंदर अच्छे संस्कार पैदा करना तथा उन्हें आर्थिक दृष्टि से आत्मनिभ्रर बनाना है। वास्तविक शिक्षा वही है जो व्यक्ति को सभी प्रकार के अंधकारों और बंधनों से मुक्त करती है, असत्य और अपवित्रता से छुड़ा देती है। शिक्षा का उद्देश्य भावी युवा पीढ़ी के चरित्र का विकास करना तथा उन्हें राष्ट्रप्रेम के संस्कार डालना तथा उन्हें राष्ट्र के प्रति, समाज के प्रति उनके कर्त्तव्यों को निभाने की जिम्मेवारी के योग्य बनाना है। इन सब बातों की विस्तारपूर्वक चर्चा पुस्तक में की गयी है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45104862625982,"sku":null,"price":316.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/shikshakaisiho_new.jpg?v=1748082553"},{"product_id":"shikshakon-ke-kaksha-shikshan-vyavhar-ka-tulanatmak-adhyayan","title":"Shikshakon Ke Kaksha Shikshan Vyavhar Ka Tulanatmak Adhyayan","description":"\u003cp\u003eAuthor : Chandrabhushan Singh\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45107142688958,"sku":null,"price":236.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/shikshkonkekashashikshan.jpg?v=1748241228"},{"product_id":"school-readiness-programe","title":"School Readiness Programme","description":"\u003cp\u003eयह हमारा दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता-प्राप्ति के इतने वर्ष बीत जाने पर आज भी हम सैद्धांतिक शिक्षा देकर बच्चों से उनका बचपन छीन रहे हैं। लेखिका ने अपने अथक प्रयास से यह बात हमारे सम्मुख पुस्तक के माध्यम से रखी है कि किस प्रकार बालक को शिक्षा पाने के लिए स्वत: तैयार करें। बड़ी-बड़ी योजना कागज पर प्रस्तुत करने से नहीं, उन्हें क्रियात्मक जामा पहनाने से ही हम अपने उद्देश्यों की प्राप्ति कर सकते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस पुस्तक में मूल रूप से पूर्व प्राथमिक शिक्षा के समुचित कार्यान्वयन पर बल दिया गया है ताकि बच्चों की पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत हो जाए। पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत हो जाने पर शिक्षा बाधित होने का प्रश्न ही नहीं उठता। आशा है शिक्षा जगत के महारथी, अभिभावक, शिक्षक सभी इस पुस्तक में दिए गए सुझावों को नौनिहालों को शिक्षित करने में उपयोग करेंगे और उनके स्वप्नों को साकार करेंगे।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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होता है, जो उस राष्ट्र की आकांक्षा, आदर्श व मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है। शिक्षा प्रबंधन की संरचना भी तद्नुसार ही तय होती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45107196854462,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/shaikshikprabandhanNEW.jpg?v=1748244068"},{"product_id":"balak-ka-bhav-vikas","title":"Balak Ka Bhav-Vikas","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45107210420414,"sku":null,"price":520.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/balakkabhavvikas.jpg?v=1748244748"},{"product_id":"samanya-manovigyan","title":"Samanya Manovigyan","description":"\u003cp\u003eप्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने इस बात का प्रयत्न किया है कि मनोविज्ञान के नवीनतम साहित्य का समावेश किया जाए। लेखक को उच्च कक्षाओं में सामान्य मनोविज्ञान के अध्यापन का सुअवसर प्राप्त हुआ है अतः उसे छात्रों की कठिनाइयों का कुछ अनुभव है। प्रस्तुत पुस्तक को छात्रों के लिए अधिकाधिक उपयोगी बनाने का भरसक प्रयत्न किया गया है। स्थान-स्थान पर पारिभाषिक शब्दों के अंग्रेजी-रूपों को दे दिया गया है और प्रत्येक अध्याय के अन्त में निष्कर्ष के साथ-साथ कुछ अभ्यासार्थ प्रश्न भी दिए गए हैं। आशा है पुस्तक भारतीय विश्वविद्यालयों के उन छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी जिन्होंने हिन्दी भाषा को अपने अध्ययन का माध्यम चुना है। पुस्तक की भाषा को दुरूह एवं शास्त्राीय होने से बचाया गया है अतः इसमें वर्णित विषय को समझने में सरलता होगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45107213566142,"sku":null,"price":716.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/SamanyaManovigyan_new_3-1-25.jpg?v=1748245130"},{"product_id":"ghar-parivaar-aur-rishte","title":"Ghar-Parivaar Aur Rishte","description":"\u003cp\u003eAuthor : Anjali Bharti\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45107230376126,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/GharParivarAurRishte_1.jpg?v=1748246505"},{"product_id":"bachchon-ki-parvarish-karne-ke-behatarin-tarike","title":"Bachchon Ki Parvarish Karne Ke Behatarin Tarike","description":"\u003cp\u003eआदर्श जीवन भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा है। ईमानदार, मेहनती, उदार, संवेदनशील, सहनशील, दयालु, परोपकारी बालक ही आगे चलकर एक आदर्श व्यक्ति बनता है। बालक और बालिका दोनों ही एक आदर्श नागरिक बनें और परिवार, समाज, पड़ोस, देश का नाम रोशन कर सबका मान बढ़ाएँ, इसके लिए सबसे पहले अभिभावकों को आदर्श बनने की जरूरत है। हर घर में आदर्श अभिभावक होंगे तो फिर बालक भी आदर्श होंगे, इसमें कोई शक नहीं है। बड़ों को सम्मान, आदर, पर्याप्त देखभाल जो बालक करते हैं, वहाँ सुख, शांति और समृद्धि में कोई अभाव कभी नहीं होता है, इसके साथ ही वहाँ आने वाली पीढ़ी भी होनहार और प्रगति करने वाली होती है। आजकल हर परिवार में नैतिकता का घोर अभाव है। बालकों को न तो घर की तरफ से नैतिक ज्ञान प्राप्त होता है और न ही शिक्षकों की तरफ से ही प्राप्त होता है, यही कारण है कि बालकों की नजर में नैतिक ताकत का कोई महत्त्व नहीं रह गया है। प्रस्तुत पुस्तक बालकों को आदर्श और होनहार बनाने में आपकी मदद करेगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45107304628414,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bachchonkiparvarishkareneke.jpg?v=1753770930"},{"product_id":"kya-badon-se-ghar-kharab-hota-hai","title":"Kya Badon Se Ghar Kharab Hota Hai?","description":"\u003cp\u003eघर की पूरी व्यवस्था बड़ों के हाथ में होती है। भेदभाव वे ही करते हैं। सारे अधिकार उन्हीं के पास होते हैं। जो बहू उनकी प्रशंसा करती है, उस पर उनकी कृपा बरसती है और जो बहू केवल अपना फर्ज अदा करती है और झूठी प्रशंसा करने में संकोच करती है उस पर उनका क्रोध बरसता है। बेटा और बेटी में अंतर बड़े ही तो करते हैं, छोटों को तो बड़ों से ही पता चलता है कि स्त्री और पुरुष में अंतर है और घर तथा समाज में पुरुषों से भिन्न स्त्री की स्थिति है। बड़ों से ही प्रेरित होकर बच्चे ईर्ष्या-द्वेष करना सीखते हैं, बदले की भावना, किसी को अपमानित करने और किसी का मजाक बनाने की आदत बड़ों से ही तो बच्चों में पड़ती है। बच्चों में परस्पर वाद-विवाद और अलगाव की स्थिति बड़े ही तो उत्पन्न करते हैं। बड़े अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान और ईमानदार होते हैं तो फिर घर खराब नहीं होता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45107307937982,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/kya-badon-se-ghar.jpg?v=1766561714"},{"product_id":"bachche-kyon-bigadte-hai","title":"Bachche Kyun Bigadte Hain","description":"\u003cp\u003eबाल-मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों को कभी भी हल्के नहीं लेना चाहिए। बच्चों पर अपनी इच्छाएँ, अपनी पसंद और अपने विचार जब अभिभावक थोपने की कोशिश करने लगते हैं तो बच्चे उनसे जी चुराने लगते हैं, उनके सामने आने से कतराने लगते हैं और जैसे-जैसे बड़े होते हैं, वैसे-वैसे उनसे नफरत करने लगते हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eबच्चों की पसंद को समझकर उनको चीजे मुहैया करवाएँ ताकि वे उन्हें इस्तेमाल कर सकें। जब बच्चों के आदर्श उनके मम्मी-पापा नशेड़ी हैं, झूठे हैं और चरित्रहीन हैं तो फिर बच्चों को बिगड़ने से वे कैसे रोक सकते हैं और वे राकेंगे तो बच्चों के मुख से सुनेंगे कि तुम क्यों पी रहे हो? आजकल बच्चों को सबसे ज्यादा स्मार्ट फोन बिगाड़ रहा है, इसके बाद नशा बिगाड़ रहा है, फिर माडर्न विचारों वाले मम्मी-पापा के रोमांटिक और अमर्यादित रिलेशनशिप भी बच्चों को बिगाड़ रहा है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eबच्चों के सामने झूठ बोलोगे तो बच्चा तो झूठ बोलना सीखेगा ही। अतः सबसे पहले स्वयं को अनुशासित करें, झूठ बोलना बंद करें, बेईमानी करना छोड़े और अपने उसूलों का पालन करना शुरू कर दें ताकि बच्चे आपकी नकल करें तो स्वाभाविभक रूप से उनमें वे उपरोक्त अच्छाइयाँ उत्पन्न हो जाएं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eपुस्तक में बच्चों के बिगड़ने के कारण और उनके समाधान सरल भाषा-शैली में दिए गये हैं ताकि उनपर अमल कर अपने बच्चों को बिगड़ने के बजाय उनका भविष्य संवारे।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45107316883646,"sku":"","price":476.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/BachcheKyonBigartehain.jpg?v=1748249662"},{"product_id":"modern-family-ki-problems","title":"Modern Family Ki Problems","description":"\u003cp\u003eआधुनिक समाज यदि सबसे अधिक परेशान और दुःखी है तो उसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार भी है। आज संयुक्त परिवार न के बराबर ही हैं और एकल परिवार गाँवों में भी और शहरों में भी पर्याप्त संख्या में हैं। एकल परिवार में पति, पत्नी और बच्चे ही होते हैं। एकल परिवार में समस्या-ही-समस्या है, इसके सिवा और कुछ भी नहीं है। एकल परिवार में पलने-बढ़ने वाले बच्चे न तो रिश्तों को जानते हैं, न ही नैतिकता का ज्ञान प्राप्त कर पाते हैं, न ही मर्यादा का अर्थ समझते हैं और न ही शोरगुल और भीड़भाड़ को ही बर्दाश्त कर पाते हैं जिससे उनमें बर्दाश्त करने की क्षमता का अभाव हो जाता है। वे चिड़चिड़े और गुस्सैल प्रवृति के हो जाते हैं। बच्चे इतनी सुविधाओं में रहकर पढ़ रहे हैं और जब बड़े होते हैं और पढ़-लिखकर पैसा कमाने लगते हैं तब माता-पिता से भर मुँह बात नहीं करते और कुछ कहने या पूछने पर उलटे ही जवाब देते हैं। आज की सबसे बड़ी समस्या बिगड़ैल बच्चों से निपटना है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअब सवाल यह उठता है कि बच्चों का इतना बद्तमीज किसने बनाया है। बच्चों को आधुनिक व्यवस्था, आवश्यकता से अधिक मिली आजादी तथा माता-पिता का असीम लाड़-प्यार ही उदंड और बद्तमीज बना रहा है। बच्चों को आपका अतिरिक्त प्यार बिगाड़ता है और उन्हें कर्त्तव्यनिष्ठ, मेहनती, ईमानदार तथा तमीज में रहकर बात करने वाला बनाना है तो इस पुस्तक का पठन करें जिसमें बच्चों के प्रति अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह कैसे करना है आदि सभी तरीके बताये गए हैं ताकि बच्चे कर्त्तव्यनिष्ठ, मेहनती तथा ईमानदार बनकर आपका नाम रोशन कर सकें।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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Major aspects covered in this book include the understanding counselling psychology: elements and dimensions of educational psychology; role and scope of educational counselling: and process, goals and skills of counselling. Focus lies on guidance and counselling psychology: counselling skills in training; and techniques in counselling and guidance.\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45122390491326,"sku":null,"price":636.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/psych-and-councelling.jpg?v=1767001244"},{"product_id":"vishwa-vikhyat-bhartiya-prachin-vishwavidyalaya-1","title":"Vishwa Vikhyat Bhartiya Prachin Vishwavidyalaya","description":"\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eशिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन काल से ही भारतवर्ष में शिक्षा एवं शिक्षण को बहुत अधिक महत्त्व दिया गया था। भारतीय उपमहाद्वीप प्राचीन काल से ही शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। वैदिक काल से ही भारत में गुरुकुल और आश्रमों के रूप में शिक्षा केंद्र खोले जाने लगे थे। जहाँ वैदिक शिक्षा के साथ-साथ अन्य महत्त्वपूर्ण विषयों को भी पढ़ाया जाता था। वैदिक काल के बाद जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया, भारत की शिक्षा प्रणाली भी उतनी ही विकसित होती गयी। यह गुरुकुलों, आश्रमों और पाठशालाओं से शुरू होता हुआ शिक्षा का सफर उन्नति करते हुए विद्यालय और विश्वविद्यालय के रूप में बदलता गया। भारतवर्ष में कई ऐसे भी विश्वविद्यालय थे जो उस समय शिक्षा के लिए विश्व भर में जाने जाते थे। यहाँ उन्हीं विश्वविद्यालयों से जुड़ी हुई कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारियों को एकत्रित करने का प्रयास किया है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45173030125758,"sku":null,"price":360.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/vishwa-vikhyat-prachin-vishwavidyalay.jpg?v=1767952590"},{"product_id":"bharat-mein-shiksha-ka-vikas","title":"Bharat Mein Shiksha Ka Vikas","description":"\u003cp\u003eजैसा कि यह सभी जानते हैं कि भारत 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ। सब यही समझते हैं कि हम उसी दिन स्वतंत्र हुए। लेकिन यह एक बहुत बड़ा भ्रम था। महात्मा गांधी ने अंग्रेजों से सामने बिना किसी शर्त के पूर्ण स्वतंत्रता की मांग रखी थी। लेकिन भारत के ही कुछ स्वार्थी लोगों ने अंग्रेजों की राष्ट्र विरोधी शर्तों को सशर्त स्वीकार कर लिया था. जिसमें एक भाषा नीति भी थी। अंग्रेजों को पता था कि यह देश अपनी भाषा के बल पर आगे और भी प्रगति कर सकता है। इसी को रोकने के लिए अंग्रेजों ने कुछ अंग्रेजी प्रिय भारतीयों के साथ मिलकर भारतीय शिक्षा पद्धति में संस्कृत को स्थान न देने जैसे राष्ट्र विरोधी शर्तें भी शामिल की। अब प्रश्न यह उठता हैं कि ऐसी स्थिति उत्पन्न क्यों हुई? समस्या जितनी गंभीर होती है, उसके कारण भी बहुत शोधगम्य होते हैं। इसकी शुरूआत भी आजादी के पहले से होती है। मैकाले नामक अंग्रेज के ही वह जहरीले बीज हैं, जो अब फलीभूत हो रहें हैं। दरअसल, अंग्रेजों ने भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सर्वेक्षण करने के बाद, जो शिक्षा नीति भारत को गुलाम बनाये रखने के लिए बनायी थी, वही नीति स्वतंत्रता के बाद भी कुछ लोगों द्वारा जारी रखी गई, जिसका परिणाम हैं कि आज हमारी शिक्षा व्यवस्था रोजगार की गारंटी नहीं देती। शिक्षित होने के बाद भी नैतिकता की कोई गारंटी नहीं है तथा स्थिति तो और भी बदतर तब हो जाती है, जब पढ़े-लिखे शिक्षा प्राप्त लोगों में इन सभी स्थितियों के बारे में उदासीनता पायी जाती है। उनमें न भारतीय संस्कृति के प्रति आदर है और न ही उन्हें इसकी परवाह है। उच्च शिक्षा प्राप्त आधुनिक पीढ़ी के मन में भारतीय इतिहास के बारे में गौरव की भावना नहीं है, क्योंकि उनके पाठ्यक्रम में हमने वही परोसा ही है, जिसका परिणाम यह हुआ कि वे अपने आप को सर्वश्रेष्ठ भारतीय समझने की बजाय अपने आप को कुठित एवं दब-कुचले महसूस करते हैं। इसका कारण उनका पाठ्यक्रम हैं, जिसमें ज्ञान-विज्ञान का संपूर्ण स्रोत पश्चिमी विद्वान है। उन्हें भारतीय वैज्ञानिकों का नाम भी पता नहीं होता है। उनके लिए भारत तो केवल जमीन का टुकडा मात्र है। ऐसा हो भी क्यों ना? अंग्रेजों की खुराफाती दिमाग जाते-जाते भी हमें भेदभाव और अज्ञान का शिक्षा विरासत में दे गए।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45251248226494,"sku":null,"price":476.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/BharatMeinShikshaKaVikas.jpg?v=1753772150"},{"product_id":"school-pustakalya-ke-vividha-roop","title":"School Pustakalya Ke Vividha Roop","description":"\u003cp\u003eयह पुस्तक मुख्य रूप से एक पाठ्य-पुस्तक है, जिसमें माध्यमिक स्कूल के स्तर पर पुस्तकालय के कार्य की विवेचना की गई है। किन्तु, समग्र शैक्षणिक अनुभूति की भाँति, विद्यार्थी का पुस्तकालय सम्बंधी अनुभव भी एक अविच्छिन्न प्रक्रिया होनी चाहिए, जूनियर या सीनियर हाई स्कूल का पुस्तकालय-अध्यक्ष तब तक कारगर तरीके से काम नहीं कर सकता जब तक उसे, जो कुछ पहले कहा जा चुका है उसी की नहीं, बल्कि जो कुछ आगे आने वाला है उसका भी, ज्ञान न हो और उसके आधार पर वह आगे न बढ़ सके।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eऐसी परिस्थितियों में, तैयारी कितनी भी क्यों न की जाए, उसे अधिक विशेषज्ञतापूर्ण नहीं कहा जा सकता। प्रस्तुत पुस्तक इसीलिए, एक बुनियादी पाठ्य-पुस्तक है जिसमें ऐसे सिद्धान्तों, ऐसी अभिवृत्तियों, संस्थाओं, प्रशासनिक और वित्तीय पृष्ठभूमियों और कार्य-पद्धति सम्बंधी आधारभूत बातों का विवेचन किया गया है जो आदि से अन्त तक मान्य और उपादेय हैं। कार्य-पद्धति के प्रयोग के संदर्भ में माध्यमिक स्कूल की चर्चा इसलिए अधिक की गई है कि निम्न वर्गों में कार्य करने के सम्बंध में एक बहुत बढ़िया पुस्तक उपलब्ध हो।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":46398509252798,"sku":null,"price":1116.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/school-pustkalya-ke-vivdh.jpg?v=1771051475"},{"product_id":"siddhant-aur-adhyayan","title":"Siddhant aur Adhyayan","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":46401660190910,"sku":null,"price":716.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/siddhant-aur-adhyan-1.jpg?v=1771224031"}],"url":"https:\/\/atmarambooks.com\/collections\/education.oembed","provider":"Atma Ram and Sons","version":"1.0","type":"link"}