{"title":"Freedom Struggle","description":"\u003cp data-start=\"193\" data-end=\"333\"\u003eExplore inspiring books on India’s freedom struggle and the remarkable stories of fearless freedom fighters who shaped the nation’s destiny.\u003c\/p\u003e","products":[{"product_id":"gandhi-ji-ki-anmol-suktiyan","title":"Gandhi Ji Ki Anmol Suktiyan","description":"\u003cp\u003eसत्याग्रह की लड़ाई तो आत्मवीरों के लिए है, डरपोकों या अश्रद्धालुओं के लिए नहीं। सत्याग्रह तो हमको जीने और मरने की कला सिखाता है। * पराजय से सत्याग्रही और अहिंसक की आत्मा को निराशा नहीं होती। उससे तो कार्य-क्षमता और लगन बढ़ती है और सत्य से मनुष्य की बुद्धि परिष्कृत होकर उसका मार्गदर्शन करती है। * विजय के लिए केवल एक सत्याग्रही ही काफी है। * सत्याग्रह सत्ता प्राप्त करने के लिए नहीं, सत्ता को शुद्ध करने और उसका सदुपयोग करने के लिए होता है। * अपने विरोधी के साथ सम्मानपूर्वक समझौता होने का अवसर न खोना और उसे अपने विचारों में ले आना भी सत्याग्रह का ही एक अंग है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45055022235838,"sku":null,"price":280.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/gandhi-jiki-anmol.jpg?v=1766390352"},{"product_id":"subhash-chandra-bose-nissang-kranti-pathik","title":"Subhash Chandra Bose : Nissang Kranti Pathik","description":"\u003cp\u003eयदि सफलता का मापदण्ड त लक्ष्य उपलब्धि है तो तुभाषचन्द्र निश्चय ही सर्वधा असफल क्रांतिकारी कड़े जाएंगे क्योंकि उनका प्यासा रक्त मातृ भूमि की स्वतंत्रता का साक्षी नहीं हुना। किन्तु, यदि जन-चेतना में आज़ादी की महत्ता को समझने-परखने की क्षमता से मूल्यांकन किया जाय तो स्वतन्त्रता संग्रामी सुभाष बोस ने, एकनिष्ठ लक्ष्य के निमित्त, अपने त्याग और बलिदान द्वारा इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। क्या व्यापार संघ, क्या युवा, क्या छात्र, क्या महिलाएँ- सभी वग्रों में उन्होंने स्वतन्त्रता आन्दोलन में सक्रिय सहयोग की अनिवार्य चेतना जागरित की। उन्होंने अपने प्रेस वक्तव्यों तथा अध्यक्षीय भाषणों द्वारा देश की जनता को यदि एक तरफ सार्वजनिक आन्दोलन की ओर उन्मुख किया तो दूसरी तरफ़ ब्रिटिश सत्ता के प्रति विरोध एवं विद्रोह की भावना प्रज्वलित की। प्रस्तुत ग्रन्थ इतिहास-पुरुष सुभाषचन्द्र बोस की जीवन यात्रा की झाँकी है। आशा है पाठक वर्ग को यह ग्रंथ अवश्य पसन्द आएगा।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45067390419134,"sku":null,"price":636.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/subhash-chand_d548b91b-2fbb-40da-9e6b-5912dc62bd24.jpg?v=1768385692"},{"product_id":"bhartiya-krantikari-aandolan-ka-itihas","title":"Bhartiya Krantikari Aandolan Ka Itihas","description":"\u003cp\u003e'भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन का इतिहास' जिसका प्रकाशन इस संस्था आत्माराम एण्ड संस को प्रकाशित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ क्योंकि ऐसा प्रमाणिक ग्रंथ न तो कभी इससे पूर्व लिखा गया है और न भविष्य में लिखा जाएगा। भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास स्वयं एक इतना विस्तृत तथा महत्त्वपूर्ण विषय है कि उस पर किसी ग्रंथ की रचना एक आदमी की शक्ति के बाहर है, पर चूँकि अपने देश में सामूहिक साहित्यिक यज्ञ की प्रथा अभी अच्छी तरह पनपी नहीं, इसलिए जिनमें धुन और लगन होती है, वे अकेले ही उसमें जुट जाते हैं और यथाशक्ति उसे पूरा करने का प्रयत्न भी करते हैं। यह बड़े सौभाग्य की बात है कि इस ग्रंथ के लेखक अपने विषय के पूर्ण अधिकारी हैं। वह खून लगाकर शहीद बनने वालों में नहीं, बल्कि उन्होंने अपने जीवन के पूरे बीस वर्ष जेल में बिताए हैं। युवावस्था में ही उन्होंने काकोरी षड्यन्त्र में भाग लेकर क्रान्ति के प्रति अपनी सच्ची लगन सिद्ध कर दी थी। श्री मन्मथनाथ गुप्त एक सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी रहे हैं। उन्होंने स्वयं क्रान्तिकारी आन्दोलन में सक्रिय भाग ही नहीं लिया, उनका सभी क्रान्तिकारियों से निकट सम्पर्क भी रहा है। अतः हमारे लिए गौरव का विषय है कि हम क्रान्तिकारी आन्दोलन का एकमात्र प्रामाणिक इतिहास का नवीनतम संस्करण पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45122346418366,"sku":null,"price":796.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bhartiya-kranti-kari-andolan-12.jpg?v=1771320371"},{"product_id":"bandi-jeewan","title":"Bandi Jeewan","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45122349891774,"sku":null,"price":796.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/Bandi-Jeewan.jpg?v=1765965826"},{"product_id":"yash-ki-dharohar","title":"Yash Ki Dharohar","description":"\u003cp\u003eपुस्तक में उन पाँच अमर शहीदों की बलिदान-कथाएँ हैं, जिन्होंने अपने प्राणों को निर्भय और निर्मम होकर स्वाधीनता यज्ञ में डाल दिया था और जिनकी कीर्ती स्वाधीनता-संग्राम के इतिहास में सदा अबिस्मरणीय बनी रहकर देश के भावी सपूतों को प्रेरणा देती रहेगी। ये हैं- सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर ‘आज़ाद’, राजगुरु, नारायणदास खरे और सुखदेव। पुस्तक की प्रमुख विशेषता इसकी प्रामाणिकता है, क्योंकि इस पुस्तक में प्रकाशित सभी संस्मरण उन देशभक्तों द्वारा लिखे हुए हैं जिन्होंने इनके सहयोगियों के रूप में कार्य किया था।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45122353430718,"sku":null,"price":360.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/yash-ki-dharohar_45aaa5f2-c8d2-4e3e-968c-bdf7608a6ef8.jpg?v=1767683607"},{"product_id":"ganeshshankar-vidhyarthi","title":"Ganesh Shankar Vidyarthi","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45122362376382,"sku":null,"price":360.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/Ganesh-Shankar-Vidyarthi_e87a95af-4b79-4ad1-aaab-28723d7d6e02.jpg?v=1765965076"},{"product_id":"atmakatha-ramprasad-bismil","title":"Aatmakatha Ramprasad 'Bismil'","description":"\u003cp\u003eयह आत्मकथा गोरखपुर जेल की फाँसी की कोठरी में फाँसी पर झूलने के तीन दिन पहले तक अधिकारियों की नजर बचाकर लिखी गई थी। \u003cbr\u003eउन्हीं के शब्दों में- इस कोठरी में यह सुयोग्य प्राप्त हो गया कि अपनी कुछ अंतिम बात लिखकर देशवासियों को अर्पण कर दूँ। संभव है कि मेरे जीवन के अध्ययन से किसी आत्मा का भला हो जाए। बड़ी कठिनता से वह शुभ अवसर प्राप्त हुआ।\u003cbr\u003eमहसूस हो रहे हैं बादे फना के झोंके, खुलने लगे हैं मुझ पर असरार जिंदगी के। यदि देश हित मरना पड़े मुझको अनेकों बार भी, तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाऊँ कभी, हेईश ! भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो, कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कम हो।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45122373222590,"sku":null,"price":316.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/Aatma-katha-ram-prasad-bismil.jpg?v=1765964468"},{"product_id":"gadar-parti-ka-itihas","title":"Gadar Parti Ka Itihas","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45122377318590,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/Gadar-party-ka-itihas.jpg?v=1765965370"},{"product_id":"bhartiya-veerangnaon-ki-shaurya-gatha","title":"Bhartiya Veerangnaon ki Shaurya Gatha","description":"\u003cp\u003eप्रथम विश्वयुद्ध में भारत की फौज अंग्रेजों की मदद के लिए इंग्लैंड पहुँची। रास्ते में फ्रांस के बंदरगाह पर जहाज रुका। सैनिक बाजार घूमने के लिए चले गए। वहाँ मैडम भीकाजी कामा उनकी प्रतीक्षा कर रही थीं, सभी भारतीय सैनिकों को अभिवादन कर उनका हाल-चाल पूछा और उन्हें प्रभावशाली भाषा में समझाना शुरू किया। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\"मेरे वीर बच्चो ! तुम उस देश की तरफ से लड़ने जा रहे हो जिसने हमारी भारत माता को कैद कर रखा है। यदि अंग्रेजों की तरफ से लड़ोगे तो भारत माता के बंधन और दृढ़ होते चले जाएँगे। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eयाद रखो यह युद्ध हमारा नहीं है, तुम्हें धोखे में रखा जा रहा है, तुम्हें मरने के लिए मोर्चे पर भेजा जा रहा है। अपनी मातृभूमि को गुलाम बनाने वालों की ओर मत लड़ो।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\" आजाद हिन्द फौज में तीन लाख सैनिकों में पचास हजार महिलाएँ थीं। सन् 1757 से सन् 1947 तक भारतीय नारी ने आवश्यकता पड़ने पर तन, मन और धन से सहयोग दिया। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eआजादी के बाद देश ने पड़ोसी देश से जो युद्ध लड़ा, उसमें भी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से योगदान को नकारा नहीं जा सकता। देश को गुलाम बनाने का षड्यंत्र 17वीं शताब्दी से ही शुरू हो गया था।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45145317081278,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bhartiya-veeranganyen.jpg?v=1767770011"},{"product_id":"aadivasi-krantikari-birsa-munda","title":"Aadivasi Krantikari Birsa Munda","description":"\u003cp\u003eबिरसा धर्म मुख्यतः पुरातन मूल्यों की पुनर्स्थापना के उद्देश्य से प्रेरित था। इस धर्म का जन्म मुंडा भूमि की मिट्टी-धूल से हुआ था। इसमें संदेह नहीं कि बिरसा धर्म एक सुधारवादी आंदोलन के रूप में शुरू हुआ जिसमें प्रार्थना, ईश्वर और पृथ्वी पर उनके संदेशवाहक के रूप में बिरसा के प्रति निष्ठा, एक आचरण संहिता का पालन, मद्यपान और बलिदानों का निषेध आदि बातों पर जोर दिया गया था। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में जनजातीय, सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था के विघटन की पृष्ठभूमि में मुंडाओं के बीच उभरते राजनीतिक आंदोलन और इसके नेतृत्व के उदय और कार्यकलाप का विवेचन है। उनकी भूमि, जिसे उनके पूर्वजों ने अति प्राचीन काल में साँपों और बाघों के जबड़ों से खींचकर खेती के योग्य बनाई थी, वह भूमि उनसे छिन गई थी। सरदारों ने मुंडाओं के भूमि अधिकार और उनका खोया राज्य वापस लाने के लिए खूब प्रयास किया। इसी उद्देश्य को लेकर बिरसा ने भी प्रयास किया।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45145318654142,"sku":null,"price":476.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/AadivasiKrantikariBirsaMunda.jpg?v=1750160556"},{"product_id":"british-indian-army-ki-ankahi-kahaniyan","title":"British Indian Army Ki Ankahi Kahaniyan","description":"\u003cp\u003eब्रिटिश शासन में भारत के अंदर जिस सेना को विकसित किया गया, उसका नाम ब्रिटिश इंडियन आर्मी था। भारत गुलाम था, भारत को ब्रिटिश की तरफ से विश्वयुद्धों में भाग लेने के लिए प्रलोभन दिए गए। उनमें प्रथम प्रलोभन था-भारत को स्वतंत्र करना परंतु ऐसा कर नहीं पाए। इसी प्रलोभन में आकर भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश के नेतृत्व में प्रथम एवं द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लिया। इन दोनों युद्धों में 10 करोड़ से अधिक व्यक्ति मारे गए। ब्रिटिश शासन ने अपने हितों की सुरक्षा हेतु भारतीय सैनिकों को युद्ध में धकेल दिया। उनके पास वर्दी, जूते, गोली-बारूद तक का अभाव था। फिर भी भारतीय सैनिकों ने अपने शौर्य का प्रदर्शन किया। उनमें से अधिकतर वापस लौटकर भारत नहीं आ पाए, क्योंकि वे वहीं शहीद हो गए।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45177138544830,"sku":null,"price":360.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/BritishIndiaArmy.jpg?v=1750937562"},{"product_id":"swatantrta-sangram-ke-alapgyat-krantikari","title":"Swatantrta Sangram ke Alapgyat Krantikari","description":"\u003cp\u003eप्रस्तुत पुस्तक का मुख्य उद्देश्य ऐसे अल्पज्ञात क्रांतिकारियों के शौर्यपूर्ण कार्यों, अदम्य साहस, भारत माता की परतंत्रता की बेड़ियों को काटने के लिए हँसते-हँसते अपने प्राणों का बलिदान करने, ब्रतानिया सरकार के अत्याचार, लूट-खसोट, शोषण-दमन का पुरजोर विरोध करने व देश की आजादी के लिए बड़ी दिलेरी के साथ फाँसी का फन्दा चूमने, उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों एवं विचारधारा को प्रकाश में लाना है कि वे आजादी के बाद देश में किस प्रकार की शासन व्यवस्था चाहते थे। इन अमर शहीदों ने गुलामी के जहर को समाप्त करने के लिए अपनी बेशकीमती जान गंवाकर आजादी की अलख जगाई लेकिन उनके शौर्यपूर्ण कार्य, महान त्याग व बलिदानों को भुला दिया गया। पुस्तक का उद्देश्य उन्हीं महान आत्माओं के स्वतंत्रता-प्राप्ति में योगदाब को प्रकाश में लाना है ताकि देश की जनता, वर्तमान युवक एवं युवतियाँ उनके बारे में समुचित जानकारी प्राप्त कर सकें और उनके त्याग, बलिदान एवं शौर्यपूर्ण कार्यों से प्रेरणा प्राप्त कर देश और समाज की उन्नति के लिए अग्रसर हो सकें।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45200039116990,"sku":null,"price":796.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/swatantrta-sangram-ke-alpgyat.jpg?v=1767683355"},{"product_id":"bhartiya-swatantrta-sangram-mein-gadar-party","title":"Bhartiya Swatantrta Sangram Mein Gadar Party","description":"\u003cp\u003eपुस्तक में ऐसे देशभक्तों, आजादी के दीवानों, गुलामी के जहर को खत्म करने वाले अमर शहीदों के शौर्यपूर्ण कार्यों, अदम्य साहस, हँसते-हँसते फाँसी के फन्दे को चूमने तथा बड़ी दिलेरी के साथ मौत को गले लगाने को प्रकाश में लाना है। जिन्होंने अपना कल हमारे आज के लिए बलिदान कर दिया। यह आजादी का भवन उन शहीदों की हड्डियों पर खड़ा है, शहीदों ने अपने खून से आजादी की दाग-बेल डाली। गदर पार्टी के शहीदों में आजादी की तड़प थी। गदरियों ने अपना तन-मन-धन भारत की स्वाधीनता के लिए कुर्बान कर दिया।\u003cbr\u003eगदर पार्टी का इतिहास हजारों देशभक्तों का इतिहास है। हजारों गदरी गुमनाम शहीद हो गए, उनका नाम इतिहास के पन्नों पर अंकित नहीं किया गया। गदर पार्टी के हजारों क्रान्तिकारियों को पंक्ति में खड़ा करके गोली मार दी गई, हजारों गदरियों को फाँसी पर लटकाया गया। ये आजादी के दीवाने देशभक्ति के गीत गाते-गाते शहीद हो गए। हजारों की संख्या में गदर पार्टी के क्रान्तिकारियों को अण्डमान-निकोबार (काला पानी) की जेल में डाल दिया गया तथा उनके साथ अमानवीय व्यवहार व क्रूर यातनाएँ दी गईं, जिससे अनेक गदरियों की दर्दनाक मौत हो गईं तथा उनकी लाश को समुद्र में फेंक दिया गया। अनेक गदरी अमानवीय व्यवहार के कारण पागल हो गए। ब्रतानिया सरकार इनके शौर्यपूर्ण बलिदान से भयभीत हो गई।\u003cbr\u003eगदरियों ने गुलामी के जहर को खत्म करने के लिए अपनी बेशकीमती जान होम कर आजादी के पौधे को अपने खून से सींचा, लेकिन उनके शौर्यपूर्ण कार्यों, महान त्याग व साहसपूर्ण बलिदानों को भुला दिया गया। इनका भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। वे ऐसी महान आत्माएँ थीं, जो नींव के पत्थर बन कर इतिहासकारों की दृष्टि से लुप्त रहीं। गदर पार्टी के शहीदों के शीर्यपूर्ण दिल को कैंपा देने वाले कार्यों, बलिदान को प्रकाश में नहीं लाया गया, उनके कीर्ति स्मारक नहीं बने, उन पर महाकाव्य नहीं लिखे गए। प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे गुमनाम गदर पार्टी के शहीदों की कुर्बानियों, क्रान्तिकारी गतिविधियों को प्रकाश में लाने का प्रयास किया गया है। ताकि देश की जनता, छात्र-छात्राएँ, नवयुवक-नवयुवतियाँ तथा आने वाली पीढ़ी गदर पार्टी के शहीदों के शौर्यपूर्ण बलिदान, आजादी की तड़प व देश पर मर-मिटने की प्रबल चाह से प्रेरणा लेकर, देश-भक्ति से ओत-प्रोत होकर देश और समाज की उन्नति के लिए अग्रसर हो सके।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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हेतु व्यवहार में उतारना चाहिए। वैसे भी शहीदों का स्मरण सदैव करते रहने से मन में एक परम संतोष के साथ-साथ आत्मबल भी बढ़ता रहता है। पुस्तक का यही उद्देश्य है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45459953352894,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/krantiveer-bhagat-singh.jpg?v=1767683018"},{"product_id":"bhartiya-swatantrta-samar-ke-balidani-krantivir","title":"Bhartiya Swatantrta Samar Ke Balidani Krantivir","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45459955974334,"sku":null,"price":316.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bhartiye-swatantra-samar.jpg?v=1767683145"},{"product_id":"krantiveer-ramprasad-bismil","title":"Krantiveer Ramprasad 'Bismil'","description":"\u003cp\u003eआज हमारा देश स्वतंत्र है, परन्तु हमें यह न भूलना चाहिए कि इसके लिए कितने देश-प्रेमियों ने अपने प्राणों की आहुति दी होगी, न जाने कितने प्रकार के अमानवीय व्यवहार और पाशविक अत्याचारों को सहन किया होगा। भारत की स्वतंत्रता का यह संघर्ष केवल चंद महीनों और वर्षों का नहीं था, अपितु लगभग सौ वर्ष का महासंग्राम था। सन् 1857 में जो स्वतंत्रता संग्राम प्रारम्भहुआ था, उसका अंत 15 अगस्त सन् 1947 को हमें देश की आजादी प्राप्त होने पर हुआ। इन सौ वर्षों के महासंग्राम में देश के अनेक वीरों ने हिस्सा लिया था। उनमें कुछ का नाम तो प्रकाश में आया और इतिहास के पृष्ठों पर अंकित है, पर शेष सब गुमनामी के अंधकार में लुप्त हो गए। ऐसी दशा में देशवासियों का यह पावन कर्त्तव्य हो जाता है कि वे उन क्रांतिवीरों को भुलाएं नहीं। इसका अनुमान आजादी के लिए प्रयासरत उन अमर शहीदों की गाथाओं को जानकर लगाया जा सकता है जिन्होंने अपने प्राणों का मोह छोड़कर हंसते-हंसते देश के लिए जीवन बलिदान कर दिया और फांसी के फंदे की ओर मुस्कुराते हुए-इंकलाब जिंदाबाद, ब्रिटिश साम्राज्य मुर्दाबाद के नारे लगाते शहीद हो गए। ऐसे ही शाहजहांपुर के एक वीर सपूत क्रांतिकारी रामप्रसाद 'बिस्मिल' थे जो दिनांक 9 अगस्त सन् 1925 को लखनऊ के निकट घटित 'काकोरी क्रांतिकारी ट्रेन डकैती काण्ड' के नायक थे, जिन्हें दोषी करार कर अंग्रेज सरकार ने गोरखपुर में फांसी की सजा दी । रामप्रसाद बिस्मिल और उनके साथियों ने अपने गलों में फांसी के फंदो को गर्व के साथ विजय प्रतीक के रूप में स्वीकार किया। ऐसे महान क्रांतिवीर रामप्रसाद 'बिस्मिल' की जीवन-गाथा है यह पुस्तक जो सरल, सुबोध एवं व्यावहारिक हिंदी भाषा में रोचक और कथात्मक शैली के माध्यम से प्रस्तुत है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45459958431934,"sku":null,"price":280.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/krantiveer-ram-prasad-bismil.jpg?v=1767682905"},{"product_id":"krantiveer-chandra-shekhar-azad","title":"Krantiveer Chandra Shekhar Azad","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45459960135870,"sku":null,"price":316.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/krantiveer-chandrashekhar.jpg?v=1767682785"},{"product_id":"uttarpradesh-mein-kratikari-aandolan-ka-etihas","title":"Uttarpradesh Mein Kratikari Aandolan Ka Etihas","description":"\u003cp\u003eक्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास में उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रान्त) की विशिष्ट भूमिका रही है। यद्यपि प्रारम्भ में इस आन्दोलन का केन्द्रबिन्दु बनारस रहा, परन्तु शीघ्र ही वह सम्पूर्ण प्रान्त में फैल गया। बनारस षड्यन्त्र, मैनपुरी षड्यन्त्र, काकोरी ट्रेन डकैती, मेरठ षड्यन्त्र केस इसके कुछ ज्वलन्त उद्हारण हैं। यद्यपि भारतीय जनता ने क्रान्तिकारियों के कार्यों एवं बलिदान से अधि -काधिक प्रेरणा ली और उनका वीरोचित सम्मान किया। यद्यपि पुस्तक का क्षेत्र उत्तर प्रदेश में क्रान्तिकारी आन्दोलन तक ही सीमित है परन्तु लेखक ने प्रान्त के क्रान्तिकारी आन्दोलन की पृष्ठभूमि में देश की उन क्रान्तिकारी गतिविधि - यों पर भी प्रकाश डाला है जो परोक्ष तथा अपरोक्ष रूप से प्रान्त से सम्बन्धित रही हैं अथवा जिनसे प्रान्त का क्रान्तिकारी आन्दोलन प्रभावित हुआ है। राजकीय अभिलेखागार, लखनऊ, में लेखक ने बनारस षड्यन्त्र केस, मैनपुरी षड्यन्त्र केस, काकोरी षड्यन्त्र केस, मेरठ षड्यन्त्र केस से सम्बंधित समस्त प्रपत्रों, गुप्त रिपोर्टों तथा क्रान्तिकारी आन्दोलन से सम्बंधित अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेजों का मूल रूप में अध्ययन किया। इसके उपरांत ही पुस्तक की रचना की। आशा है इस ग्रन्थ से पाठकों को उत्तर प्रदेश के क्रान्तिकारियों के कार्यों की विस्तृत, क्रमबद्ध, तथ्यपरक, प्रामाणिक व प्रेरणादाय जानकारियाँ प्राप्त होंगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45459967410366,"sku":null,"price":476.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/UttarPradeshMeinKrantikariAandolanKaItihaas.jpg?v=1759747866"},{"product_id":"krantikari-lala-hardyal-aur-unake-sahyogi","title":"Krantikari Lala Hardyal Aur Unake Sahyogi","description":"\u003cp\u003eइसी काल में दिल्ली निवासी युवा हरदयाल के हृदय में राष्ट्रवाद हिलोरें मार रहा था। उसने अपने साथ कुछ क्रांतिकारी मित्रों को अपने साथ जोड़ा जो सशस्त्र क्रांति में विश्वास करते थे। दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह अंग्रेजी सरकार की छात्रवृत्ति पर उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए। वहाँ उनके हृदय में स्वतंत्रता की तड़प उग्रतम हो गई। भारत लौटने पर उन्होंने अपनी सशक्त लेखनी से भारतीयों में स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अलख जलानी प्रारंभकी। अंग्रेज सरकार उनकी गिरफ्तारी के लिए उपयुक्त समय की प्रतीक्षा करने लगी। इनके मित्रों के सुझाव पर यह भारत छोड़कर विदेश चले गए और वहीं से भारत की स्वतंत्रता के लिए प्रयास रत रहे। वह विश्व की लगभग एक दर्जन भाषाओं को लिख-पढ़ व बोल सकते थे। वे लगभग 20-22 वर्ष विदेशों में क्रांति की मशाल को थामे रहे।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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बल्कि भारत की जनता को संवैधानिक गौरव प्रदान करने के लिए यहाँ कृपा करके आ रहे हैं। उनकी सत्ता को किसी प्रकार की चुनौती देना पूरी तरह राजद्रोह माना जाएगा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e12 दिसंबर 1911 को जार्ज पंचम ने दिल्ली को भारत की राजधानी बनाने की घोषणा की। इससे पहले कलकत्ता (कोलकाता) भारत की राजधानी थी। दिल्ली को राजधानी बनाने की घोषणा के बाद 23 दिसंबर 1912 को प्रथम बार लार्ड हार्डिंग दिल्ली में सम्राट के प्रतिनिधि के रूप में दिल्ली में प्रवेश करने वाले थे। भारत भर के क्रांतिकारियों ने उनके दिल्ली आगमन को चुनौती देने की ठानी और बंगाल के सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी, रासबिहारी बोस के नेतृत्व में चाँदनी चौक में लार्ड हार्डिंग पर बम फेंका गया जिसमें लार्ड गंभीर रूप से घायल हो गए। ब्रिटिश साम्राज्य की चूलें पूरी दुनिया में हिल गई।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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Bhakt","description":"\u003cp\u003eभारत पर अंग्रेजों ने लगभग 90 वर्षों तक राज किया था। इस अवधि में ब्रिटिश शासकों ने भारतीयों पर जो जुल्मों-सितम किया था तथा भारत के योद्धाओं व क्रान्तिकारियों ने जिस साहस से उनका सामना किया था तथा अपने देश की स्वाधीनता के लिए इन लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर अपने प्राणों की भी आहुति दे दी थी, उन लोगों में से कई लोगों के नाम जनता जान गई थी परन्तु कई ऐसे लोग भी थे जिनका नाम लोग जान भी न सके थे। देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले ऐसे ही लोगों का विवरण इस पुस्तक में समाहित किया गया है ताकि वर्तमान भारत के लोगों को, उन त्यागियों व बलिदानियों की जानकारी मिल सके तथा लोग समझ सकें कि भारत की स्वाधीनता के लिए कितने लोगों को और कैसे, अपने प्राणों की भी बलि देनी पड़ी थी और तब जाकर भारत स्वाधीन हो सका था। अपने देश की स्वाधीनता के लगभग 74 वर्षों पश्चात्, आज आम लोगों में देश भक्ति की भावना विलुप्त-सी होती जा रही है तथा देशहित व आम जनों के हित की भावना भी विलुप्त-सी हो गई है। इसी कारण उन बलिदानियों की देशहित में अपना सर्वस्व ही नहीं बल्कि अपने प्राण भी न्योछावर करने की भावना को आम जनों को अवगत कराने हेतु 'क्रांति युग के देशभक्त' पुस्तक को लिखा गया है, ताकि वर्तमान भारत के लोगों में भी देशहित व जनहित की भावना जाग्रत हो सके।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45461312438462,"sku":null,"price":556.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/kranti-yug-ke-desh.jpg?v=1767681719"},{"product_id":"kuchh-kahi-kuchh-ankahi","title":"Kuchh Kahi  Kuchh Ankahi","description":"\u003cp\u003eभारत के स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारियों का विशेष योगदान रहा है। इस संग्राम में हजारों क्रांतिकारियों को ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने फांसी पर चढ़ा दिया था तथा अनगिनत लोगों को जेल जाना पड़ा था। इन क्रांतिकारियों व इनके योगदान को देश व समाज विस्मृत करता जा रहा है। इनके विचार, सर्वस्व बलिदान करने की भावना तथा उत्कट देशभक्ति आज भी लोगों में नई स्फूर्ति जाग्रत करने तथा उन्हें देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत करने में सक्षम है। आज हमारे समाज में बढ़ती अनैतिकता व विकृति के सन्दर्भ में उन क्रांतिकारियों की सोच, उनके आदर्श विचार तथा राष्ट्रहित में सर्वस्व समर्पण करने की भावना, न सिर्फ प्रासंगिक प्रतीत होते हैं बल्कि, आज सम्भवतः देश की यही मांग है। ऐसी ही कुछ अनकही, रोचक व गंभीर चिन्तन को विवश करते लेख-जो स्वाधीनता संग्राम के कुछ क्रान्तिकारियों के विषय में है जिन्होंने देश की स्वतंत्रता व मर्यादा हेतु अपना सर्वस्व देश को अर्पित कर दिया था। यह पुस्तक उन क्रान्तिकारियों के रोमांचकारी योगदान को रेखांकित करती है तथा वर्तमान समाज के प्रत्येक क्षेत्र में विस्तार होते अनैतिकता को दृष्टिगत रखते हुए, इन क्रांतिकारियों के बलिदान, आदर्श विचार व देशभक्ति की भावना को आज की पीढ़ी, विशेषकर युवाओं को अवगत कराना आवश्यक प्रतीत होता है। इसी उद्देश्य से पुस्तक प्रस्तुत है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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अवगत कराने के उद्देश्य से इस पुस्तक में छः क्रान्तिकारी, तीन मूर्धन्य साहित्यकार तथा एक गणमान्य राजनीतिज्ञ द्वारा लिखे गए पत्रों के सन्दर्भ में इस पुस्तक की रचना की गई है ताकि पाठकगण उस जमाने के लोगों की भावना से अवगत होकर, उनमें भी देश-हित की भावना जाग्रत हो सके।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45461315453118,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/Krantikariyonkepatronkadarpan.jpg?v=1759819142"},{"product_id":"mahan-krantikari-shaheed-udham-singh","title":"Mahan Krantikari : Shaheed Udham Singh","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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हजारों क्रान्तिकारियों ने अपना सर्वस्व इस स्वाधीनता संग्राम को समर्पित कर दिया तथा अनगिनत लोग शहीद हो गये।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eक्रान्तिकारियों का एक सपना था कि अंग्रेजों के शासन से अपने देश को मुक्त कराने के पश्चात एक ऐसे समाज की स्थापना करना जिसमें ऊँच-नीच, जात-पात का कोई भेदभाव न हो, सबको समान अवसर मिले व मनुष्य का मनुष्य द्वारा शोषण न हो। स्वाधीनता के 64 वर्षों पश्चात क्रांतिकारियों का सपना पूरा होना तो दूर अपने देश में बढ़ती अनैतिकता व समाज के विकृत रूप को देखकर प्रत्येक राष्ट्रभक्त का मन हताशा व निराशा से भर उठता है। क्रान्तिकारियों के त्याग व बलिदान, राष्ट्रहित में इनकी सोच तथा आदर्श एवं दृढ़ विचारों से आज की युवा पीढ़ी अनभिज्ञ है। आज इन क्रान्तिकारियों के आदर्श को तथा अपना सर्वस्व राष्ट्रहित में समर्पण करने की भावना को युवा वर्ग ही नहीं, जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता प्रतीत होती है। इसी उद्देश्य से इन लेखों को संकलित कर 'क्रान्ति पथ पर चलते चलते ...' पुस्तक रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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होगा।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45804293718206,"sku":null,"price":636.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/akhand-bharat.jpg?v=1768891334"},{"product_id":"belagam-naxalwad","title":"Belagam Naxalwad","description":"\u003cp\u003eभारतीय सरकारों की नीतियों से आक्रोशित भारत के ही कुछ लोग भारत के खिलाफ हो गए हैं, उनकी समस्याओं को सुलझाए बिना किसी भी नतीजे पर नहीं पहुँचा जा सकता। इस वर्ग में शामिल लोगों का कहना है कि उन पर हुए अत्याचारों और अन्यायों की ही वजह से आज वह यह खूनी खेल खेलने के लिए मजबूर हुए हैं। उनकी दुर्दशा को समझते हुए सैनिक कार्यवाही जैसा विकल्प न सिर्फ मानवाधिकारों के विरुद्ध है बल्कि घोर अमानवीय भी है, क्योंकि इसमें न सिर्फ नक्सली अपनी जान गँवाएँगे बल्कि कई अन्य निर्दोष लोगों की भी जानें जाएँगी। अगर हम वाकई नक्सलवाद को समाप्त करने और देश की सुरक्षा के लिए गंभीर हैं तो हमें उन आदिवासियों से वार्तालाप कर इस समस्या का हल खोजना पड़ेगा, उन्हें हर वो हक देने होंगे जिनके ऊपर उनका अधिकार है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45805078020286,"sku":null,"price":476.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/belagam.jpg?v=1768905734"},{"product_id":"bharat-mein-angrezi-raj-1757-1857","title":"Bharat Mein Angrezi Raj 1757-1857","description":"\u003cp\u003eविश्व के इतिहास में इससे अपमान- जनक बात और क्या हो सकती है कि हम खुद ही गुलामी के हिमायती हो गए अन्यथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सरकार सन् 1857 ई. में समाप्त हो गई होती और ब्रिटिश सरकार को भारत में शासन करने का अवसर ही न मिला होता। क्रान्तिकारियों का संगठन प्रशासनीय था फिर भी लाखों भारतवासी अपने देशवासियों के विरुद्ध तरह-तरह से अंग्रेजों को सहायता दे रहे थे। रसल लिखता है- 'फिर भी हमें यह स्वीकार करना पड़ता है कि अंग्रेज चाहे कितने भी बहादुर क्यों न हो, यदि सब के सब भारतवासी पूरी तरह हमारे विरुद्ध हो जाते तो भारत में कहीं अंग्रेजों का निशान तक बाकी न रह जाता। हमारे किलों के भीतर ही सेनाओं ने जिस तरह जी तोड़कर अपने स्थानों की रक्षा की, वह निस्संदेह वीरोचित थी। किंतु इस वीरता में भारतवासी शामिल थे और उन्हीं की सहायता और उपस्थिति के कारण उन स्थानों की रक्षा करना हमारे लिए संभव हो सका। यदि पटियाला और जींद के राजा हमारे साथ मित्रता न दर्शाते और यदि सिख हमारी पलटनों में शामिल न होते और उधर पंजाब को शांत न रखते तो हमारा दिल्ली पर आक्रमण व कब्जा करना असंभव था।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45810961547454,"sku":null,"price":796.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bharat-mein-angreji.jpg?v=1768985871"},{"product_id":"bharat-mein-angrezi-raj-1857-1947","title":"Bharat Mein Angrezi Raj 1857-1947","description":"\u003cp\u003eसन् 1910 में किंग एडवर्ड के मरने के बाद जार्ज पंचम ब्रिटिश साम्राज्य के तख्त व ताज के मालिक हुए। बंगाल में बंग-भंग के कारण बड़ा गहरा असन्तोष फैला हुआ था। गत सात-आठ वर्षों से बंगाल में एक विकट परिस्थिति थी, बंगाली नहीं चाहते थे कि किसी भी हालत में बंगाल को दो भागों में बाँटा जाए। इस असन्तोष को दूर करने के लिए कुछ लोगों ने ब्रिटिश सरकार को यह सलाह दी कि जार्ज पंचम स्वयं भारत आएँ तो सारी बेचैनी दूर हो जाएगी। इसी सलाह का अनुसरण कर जार्ज पंचम ने 12 दिसम्बर, 1911 को दिल्ली में एक विराट दरबार का आयोजन किया। सम्राट ने घोषणा की कि भारत की राजधानी अब कलकत्ता के स्थान पर दिल्ली होगी। क्योंकि सरकार चाहती है कि प्राचीन इन्द्रप्रस्थ के ऐश्वर्य का फिर से उद्धार हो। यह भी घोषणा की गई कि बंगालियों के असन्तोष का ध्यान रख कर प्रजावत्सल बंग-भंग को रद्द करती है और पूर्वी व पश्चिमी बंगाल को एकत्र कर ले. गवर्नर के अधीन एक प्रांत कर दिया गया है इसका अर्थ नहीं कि बंगाल प्रांत बंग-भंग के पहले जैसा था, वैसा कर दिया गया। प्राचीन मगध की राजधानी पाटलिपुत्र का उद्धार कर पटना एक प्रांत की राजधानी बना दी गई। इस प्रांत में छोटा नागपुर, बिहार और उड़ीसा के जिले थे और इस प्रांत का नाम बिहार-उड़ीसा हुआ।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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कार्य किया है और उन कागज़ातों को देखने का भी अवसर मिला जो अब तक इतिहासकारों को नहीं मिला था। कागज़ातों, दस्तावेज़ों और चिटिठ्यों को देखने के अलावा जिन लोगों ने अंग्रेजी सत्ता हटाने व भारत और पाकिस्तान को आज़ाद कराने में प्रमुख हाथ बँटाया, उनमें से भी अधिकांश से मिलने और बात करने का जो सौभाग्य लेखक को मिला, उसी का परिणाम है यह किताब।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45810974720190,"sku":null,"price":716.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bharat-mein-britis-raj.jpg?v=1768986400"},{"product_id":"bhartiya-gantantra-ke-nirnayak-pal","title":"Bhartiya Gantantra ke Nirnayak Pal","description":"\u003cp\u003eइस साल हम भारतवासियों ने गणतंत्र के 50 वर्ष पूर्ण कर इस लंबे और घटनाओं भरे सफर का जश्न मना रहा है। यह सफर देश के इतिहास के अहम मोड़ पर शुरू हुआ और आगे कई मील के पत्थरों से गुजरा। अपने विशेषांक के लिए हमने अपनी शुरुआत के वर्ष 1975 से आज 2024 में हम जहां हैं, वहां तक देशवासियों की जिंदगी पर दूरगामी असर डालने वाली घटनाओं पर नजर डालने का फैसला किया। सारी घटनाएं खुशगवार नहीं रहीं-देश ने इमरजेंसी, हत्याकांड, प्राकृतिक आपदाएं, दंगे और आर्थिक दुश्वारियां झेलीं। मगर हमने अपने को ऐसी 50 घटनाओं तक सीमित रखा जिन्होंने हमें किसी न किसी रूप में प्रेरित किया। हम उन्हें निर्णायक पल कह रहे हैं। और 10 व्यापक श्रेणियों में रख रहे हैं-कारोबार, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लोग और लोकाचार, प्रतिरक्षा और अंतरिक्ष, गवर्नेस, पर्यावरण, स्वास्थ्य, खेल, मनोरंजन और कला, संस्कृति तथा जीवनशैली। इस तरह श्रेणीबद्ध करने के बावजूद हो सकता है उनमें कुछ में कुछ भी समान न हो और अन्य में समानता के कुछ पहलू हों। कुछ फर्क डालने वाली शख्सियतों से जुड़ी हैं, तो अन्य सामूहिक काम, सरकारी नीति और कायापलट कर देने वाले ढांचागत बदलाव से। फिर भी इंडिया टुडे की टीम देश के समूचे अनुभव के प्रतिनिधि और प्रेरक पहलुओं को संजोने में सफल रही।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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जेल' जहाँ से लौटकर बहुत कम व्यक्ति वापस आए। तीनों यातना-शिविरों में भोजन का अभाव था जिसके कारण कैदी शक्तिहीन हो जाता था, बीमारी का सही इलाज न होने के कारण मौत स्वाभाविक थी। अधिक परिश्रम भी मौत का कारण बनता था। भारत देश को आजादी दिलाने में इस 'सेलुलर जेल' का विशेष योगदान रहा। उन दिनों जो व्यक्ति इस जेल की कहानी सुनता वही इस अत्याचार के खिलाफ स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लेने लगता था। एक समय ऐसा भी आया कि जेल में स्वतंत्रता सेनानियों को रखने के लिए स्थान की कमी पड़ गई। वहीं से शुरू हुई योजनाबद्ध तरीके से अंग्रेजों की हत्या करने की साजिश, जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को भय के कारण भारत को आजाद करना पड़ा। दुर्भाग्यवश इतिहास में इन स्वतंत्रता सेनानियों को हाशिए पर रख दिया गया तथा भावी पीढ़ी को इनके बलिदान के बारे में अज्ञान में रखा गया। ये महान सेनानी जो अज्ञात हैं उनकी भारतीय इतिहास के विद्यार्थियों को जानकारी हो, इस उद्देश्य से इस ग्रन्थ की रचना की गई।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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