{"title":"Religion \u0026 Mythology","description":"\u003ch6\u003e\n\u003cmeta charset=\"utf-8\"\u003e\n\u003cem\u003eBuy Hindi religion and mythology books online featuring spiritual texts, dharmic literature, and Indian mythological studies.\u003c\/em\u003e\n\u003c\/h6\u003e","products":[{"product_id":"purano-ki-kahaniyan","title":"Purano Ki Kahaniyan","description":"\u003cp\u003eप्रस्तुत पुस्तक 29 कहानियों का संग्रह है। सभी कहानियाँ पुराणों के विशाल महासागर से ली गई हैं जिनसे गुणों का विकास तथा दुर्गुणों का ह्रास हो सकता है। नैतिक शिक्षा की ये कहानियाँ जो सरल, सुबोध भाषा शैली में हैं बच्चों के चरित्र-निर्माण में सहायक होंगी। प्रत्येक कहानी में चित्र दिये गये हैं ताकि बालक सुगमता से समझ सकें। बड़े आकार की यह सजिल्द पुस्तक है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":44991592693950,"sku":null,"price":360.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/purano-ki_b5435238-a73e-4440-9b44-7d8d8dd184ad.jpg?v=1767424481"},{"product_id":"ramayan-ki-kahaniyan-1","title":"Ramayan Ki Kahaniyan-1","description":"\u003cp\u003eइन कथाओं का आधार आदिकवि वाल्मीकिकृत रामायण भी है और गोस्वामी तुलसीदासकृत रामचरितमानस भी। हमारे देश में जितना प्रचार राम-नाम और रामायण ग्रंथ का है उतना और किसी का नहीं है। राम-चरित, भारत के जन-जन के मानस में बसा हुआ है। उसे बालक-बालिकाओं तक पहुँचाने के लिए रामायण की प्रायः सभी दिलचस्प कहानियाँ बालक-बालिकाओं के लिए सरल, सुबोध भाषा शैली में सुन्दर चित्रें सहित इस पुस्तक में दी गई हैं। बड़े आकार, बड़े अक्षरों की यह सजिल्द पुस्तक है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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Title","offer_id":44993483997374,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/ramayan-ki-kahaniyan-2.jpg?v=1767424924"},{"product_id":"bal-mahabharat","title":"Bal Mahabharat","description":"\u003cp\u003eमहाभारत एक ऐसा महाकाव्यात्मक ग्रन्थ है, जो मनुष्य को असत्य के मार्ग पर जाने से रोकता है और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह ग्रन्थ बताता है कि ईष्या, क्रोध और विद्वेष से जीवन को सफल और सुन्दर नहीं बनाया जा सकता। अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। इस ग्रन्थ के कथानक में कौरव-पाण्डवों के पारिवारिक युद्ध के द्वारा अधर्म पर धर्म की विजय को प्रतिष्ठित किया गया है। पारिवारिक कलह से न केवल दो परिवारों का विनाश होता है, अपितु समाज की सारी मर्यादाएँ भी आहत हो जाती हैं। युद्ध से कभी भी किसी समस्या का हल सम्भव नहीं है, यह इस कथा का मूल भाव है। किशोर जीवन को दृष्टि में रखकर इस महान ग्रन्थ के कथानक को सरल भाषा में यहाँ रखने का प्रयास किया गया है। हमें विश्वास है कि यह पुस्तक बालकों का मनोरंजन भी करेगी और उनमें जीवन के प्रमुख आदर्शों को भी स्थान देगी। जीवन को सहज और विकास के मार्ग पर ले जाने में यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":44993544814782,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bal-mahabharat_74d9c01d-8adb-44ca-9ea3-920e590fc77d.jpg?v=1767593038"},{"product_id":"bal-ganesh","title":"Bal Ganesh","description":"\u003cp\u003eहिंदू धर्म में सिद्धि विनायक एवं विघ्नहरण श्री गणेश जी की पूजा सभी अनुष्ठानों में सर्वप्रथम होती है। गौरीनंदन श्री गणेश संसार के सभी में सर्वश्रेष्ठ हैं और उनके अधीश्वर हैं। वे भगवान शिव के दिव्तीय पुत्र हैं। अपने बुद्धि कौशल से वे अपने बड़े भाई कार्तिकेय से भी अग्रणी हैं। शिव गणों के अहंकार का विनाश करने के लिए ही श्री गणेश का जन्म हुआ था। जन्म के समय गणेश जी सामान्य मानव शिशु की भाँति ही थे। परंतु भगवान शिव का विरोध करने पर उन्हें अपने वास्तविक मानव मुख से वंचित होना पड़ा। अपनी माता के आन-मान और वचन की रक्षा के लिये ही उन्हें अपने पिता शिव का विरोध करना पड़ा था। जिसे निभाने के लिए उन्होंने अपना शीश तक कटवा दिया था। परंतु बाद में विवश होकर भगवान शिव को अपने पुत्र के धड़ पर हाथी का शीश लगाकर जीवित करना पड़ा। इस घटना के उपरांत ही देवताओं ने श्री गणेश की अग्रपूजा का विधान निश्चित किया था। प्रस्तुत पुस्तक में श्री गणेश के बचपन की घटनाओं का आकलन चित्रो सहित किया गणों गया है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":44993827078334,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bal-ganesh_0f837add-cda9-41a5-b344-1c6e1197bdc4.jpg?v=1767685148"},{"product_id":"bal-hanuman","title":"Bal Hanuman","description":"\u003cp\u003eभारत भूमि अनादि काल से ही पुण्य भूमि मानी जाती रही है, जिसमें अनेकों देवी-देवताओं तथा ऋषियों, संतो, युग-पुरुषों तथा दिव्य महर्षियों का जन्म हुआ है जिससे भारतवासी ही नहीं विदेशों के जनमानस भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। विश्व में भारत ही एक ऐसी पवित्र भूमि है जिस पर भगवान ने स्वयं ही किसी-न-किसी रूप में अवतार लिया है। कितने ही देवी-देवताओं की अर्चना, वंदना एवं पूजा होती रही है तथा अभी भी होती है। कुछ विभूतियाँ इस धरती पर अनेक वर्षों के पश्चात् लुप्त हो गईं तथा कुछ की अर्चना कुछ ही समय तक रही परन्तु कुछेक विभूतियाँ ऐसी भी थीं जो एक बार भारत की पुण्य भूमि पर प्रकट होने के पश्चात् जन-मानस के ह्रदय पर इस प्रकार छा गई कि उनकी अर्चना-वंदना दिनोंदिन बढ़ती ही गई तथा आज भी इनकी पूजा भारत तो क्या विदेशों में भी विद्यमान है। हनुमान जी की गणना इन्हीं में की जा सकती है। वे आज कोटि-कोटि भक्तजनों के ह्रदय-स्थलों में निरंतर विद्यमान हैं। हनुमान का चरित्र तथा उनकी वीर गाथाएँ तथा अन्य विशेषताओं का वर्णन कल्पों तक भी नहीं लिखा जा सकता। हनुममान जी के जीवन की पूरी झाँकी प्रस्तुत करने का अकिंचन प्रयास किया गया है। हमें विश्वास है कि हनुमान की विस्तृत व्याख्या की एक संक्षिप्त झाँकी का दर्शन आप यहाँ अवश्य कर पाएँगे।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":44993829044414,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bal-hanuman_bfe70006-33f9-48f4-9920-b0334c73c472.jpg?v=1767684889"},{"product_id":"bal-bhishm","title":"Bal Bhisham","description":"\u003cp\u003eअपने पिता की प्रसन्नता के लिए गंगापुत्र भीष्म ने जो प्रतिज्ञा की, वह सदा-सदा के लिए इतिहास में अमर हो गई। पितृ-भक्ति का ऐसा महान उदाहरण, विश्व के किसी इतिहास में प्राप्त नहीं होता। वे समुद्र की भाँति विशाल हृदय और प्राचंड सूर्य की भाँति वीर योद्ध थे। वे अत्यंत धर्मपा्राण और नीतिकुशल महान व्यक्ति थे। ऐसे महान व्यक्तित्व को चंद शब्दों में नहीं समेटा जा सकता। उनका जीवन-चरित्र अत्याधिक प्रेरणा देने वाला है। यहाँ उस महामानव के आद्योपांत चरित्र का संक्षिप्त परिचय अत्यंत सरल भाषा में चित्रें सहित दे रहे हैं। इससे पाठकों को श्रेष्ठतम संस्कारों की अनुभूति होगी। पुस्तक को विशेषकर बच्चों को ध्यान में रखकर लिखा गया है। बड़े आकार तथा मोटे अक्षरों में यह पुस्तक सजिल्द है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":44993832026302,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/Bal-Bhishma_64dc1374-d46a-4e52-944a-d9ef250fc6bd.jpg?v=1767592880"},{"product_id":"bhagwan-budh","title":"Bhagwan Budh","description":"\u003cp\u003eपुस्तक के प्रथम अध्याय में करुणावतार ‘भगवान बुद्ध’ का जन्म और बचपन के बारे में चर्चा की गयी है। दूसरे अध्याय में ‘ सिद्धार्थ का वैवाहिक जीवन पर प्रकाश डाला गया है। तीसरे अध्याय में सिद्धार्थ का माहाभिनिष्क्रमण (संन्यास) लेने के बारे में बताया गया है। चौथा अध्याय भगवान गौतम बुद्ध का ‘ धर्म-चक्र-प्रवर्त्न’ है। पाँचवां अध्याय लोक-कल्याण के लिए उनका जन-सम्पर्क छठा और अंतिम अध्याय उनका महानिर्वाण की ओर जाना। पुस्तक में यदाकदा चित्र भी दिए गए हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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विदाई के गीत हैं। जन्मोत्सव गीतों में ललना भी है और इन गीतों में ललना शब्द की आवृत्ति होती रहती है। पुत्र के जन्मोत्सव के अवसर पर उल्लास को अभिव्यक्त करने वाले गीतों के कनथ में विविधता होती है। सोहर गीत की रचना शैली अक्सर परंपरा से जुडी रहती है। मागलिक गीतों के अंत में वर-कन्या की विवाहेच्छा, कन्या के पिता द्वास वर ढूँढने की समस्या, तिलक, मण्डप का निर्माण, विवाह, सिन्दूर दान तथा वर की बारात यात्रा आदि का वर्णन होता है। विवाह गीतों में अक्सर शिव, राम और कृष्ण जहाँ वर के प्रतीक होते हैं. वही पार्वती, सीता और राधिका, वधू का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये गीत मॉरिशस के जनजीवन के मानस में प्रचलित उनकी भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं जो विविध अवसरों पर गाये जाते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45088274874558,"sku":null,"price":476.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/ved-sukti_0fb17f2e-5a70-4f19-9c7f-ab5a7262b0ff.jpg?v=1767594066"},{"product_id":"ramkatha-ka-itihas","title":"Ramkatha ka Itihas","description":"\u003cp\u003eयह पुस्तक डॉ- अरविन्द अरोड़ा ‘मुक्त’ द्वारा लिखित मूल पुस्तक ‘रामकथा का इतिहास’ पर आधारित प्रश्नोत्तरी शैली में लिखी गई है। मूल पुस्तक के मुकाबले यह संक्षिप्त है। लेखक का मानना है कि राम की कथा ऐतिहासिक थी परन्तु इस सच्ची घटना को कल्पना और धर्म की चादर से ढक दिया गया। इसी चादर को हटाकर राम की कथा को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में लिखने का प्रयास किया गया है। रामायण की घटनाओं को ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण से आंका गया है। इस पुस्तक में रामकथा का आधार वाल्मीकि रचित रामायण है न कि तुलसी रचित रामचरित मानस।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eप्रमुख घटनाओं को वाल्मीकि रामायण की भांति प्रस्तुत किया गया है। केवल कुछ असंभव, अवैज्ञानिक लगने वाली बातों को हटाया गया है या उन्हें वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उदाहरण के तौर पर यह मान कर चला गया है कि रावण एक आतंकी सरगना था, उसकी शक्ति इतनी बढ़ती जा रही थी कि अगर उसे नहीं रोका जाता तो एक दिन उत्तर भारत भी उसके साम्राज्य के अन्तर्गत आ जाता। राम ने दक्षिण की स्थानीय जनजातियों, जो वानर, रीछ और लंगूर नाम से जानी जाती थीं, को संगठित किया और रावण को चुनौती दी। राम ने अयोध्या साम्राज्य का विस्तार किया और उसे लंका की सीमा तक पहुंचाया।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45122109964478,"sku":"","price":796.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/ramkatha-ka-itihas.jpg?v=1767596378"},{"product_id":"uttar-ramayan-ka-itihas","title":"Uttar Ramayan Ka Itihas","description":"\u003cp\u003eरामायण के उत्तरकाण्ड के अंतिम सर्ग के प्रथम श्लोक में लिखा है कि रामायण रचयिता महर्षि वाल्मीकि थे। कुश और लव ने इसे कंठस्थ कर जन-समुदाय को सुनाया। इसके बाद यह कथा अत्यंत लोकप्रिय हुई। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eग्यारहवें श्लोक में लिखा गया है कि “प्रचेता के पुत्र महर्षि वाल्मीकि” ने अश्वमेध यज्ञ की समाप्ति के बाद की कथा और उत्तरकाण्ड सहित रामायण नामक इस ’ऐतिहासिक काव्य’ का निर्माण किया है। ब्रह्माजी ने भी इसका अनुमोदन किया था। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eइससे स्पष्ट है कि महर्षि वाल्मीकि का उद्देश्य रामायण में त्रेता युग के इस स्वर्णिम इतिहास का वर्णन करना था न कि कल्पना पर आधारित किसी कथा का। अत: रामायण को इतिहास पर आधारित एक ग्रंथ मानना और उसी के अनुरूप राम के ऐतिहासिक महत्व को समझना सर्वथा उचित है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eइस पुस्तक को गद्य की सरल भाषा में लिखा इतिहास वर्तमान पीढ़ी को आत्मसात करने में सहज लगेगा, क्योंकि वर्तमान युग में गद्य अधिक प्रासंगिक हो गया है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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कुछ ऐसे थे जो समय के साथ ही अतीत में विलीन हो गए।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eपरन्तु कुछ ऐसे भी थे जिनका एक बार इस धरती पर प्रादुर्भाव हुआ तो वे जन-जन के हृदय-पटल में सदा सर्वदा के लिए ही विराजमान हो गए तथा जनमानस उन्हें युगों-युगों तक अपने हृदय स्थल में एक प्रेरणा स्त्रोत की भाँति भक्तिपूर्वक आराधना करता रहा। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eभगवान श्रीकृष्ण भी उन दिव्य विभूतियों में से एक हैं जिनकी जनमानस ने अपने इष्टदेव के रूप में सदैव आराधना की है। कोई ऐसा प्राचीन ग्रंथ नहीं जिसने उनकी अर्चना किसी-न-किसी रूप में न की हो! \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eउनकी महिमा तो आज प्रत्येक वैष्णव गृहस्थ के घर में गाई जा रही है। भारत भूमि के अनेक ग्रंथ उन सर्वशक्तिमान परब्रह्म परमेश्वर का गुणानुवाद करते हैं तथा उनकी महिमा कई जन्मों में भी गाई नहीं जा सकती। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eउनकी महिमा तो बौद्ध तथा जैन ग्रंथों ने भी भक्तिपूर्वक गाई है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eफिर भी यह एक छोटी-सी हपुस्तक भगवान कृष्ण के जीवन काल की घटनाओं से सम्बन्धित तैयार की है, जो संक्षिप्त होते हुए भी आशा है कि पाठकों के लिए रुचिकर होगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45127699267774,"sku":"","price":556.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bhagwan-shrikrishna.jpg?v=1767595468"},{"product_id":"ramkatha-ki-vichitra-jhalkiyan","title":"Ramkatha Ki Vichitra Jhalkiyan","description":"\u003cp\u003eभारतीय संस्कृति अति प्राचीन है। उसकी शोभा, गरिमा तथा महिमा अपरम्पार है। संसार के तत्कालीन समाज की अनेक प्रज्वलित तथा गम्भीर समस्याओं को जिनमें राजनैतिक, पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक सम्मिलित है, प्राचीन साहित्य में उजागर ही नहीं किया गया अपितु उनका वास्तविक समाधान भी पेश किया गया है। हमारे प्राचीन महर्षि अत्यन्त विद्वान, पारदर्शी एवं भविष्य वक्ता भी थे तथा उनकी दिव्य दृष्टि अनुपम थी तथा उनकी भविष्यवाणियाँ कभी मिथ्या नहीं होती थीं। जो आधुनिक युग में भी सर्वमान्य है। प्रस्तुत रचना में कुछ प्राचीन एवं रोचक कथाओं का विभिन्न ग्रंथों से संकलन करके पाठकों को प्रस्तुत किया गया है। आशा है यह प्रस्तुति उन्हें रुचिकर होगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45127700447422,"sku":null,"price":636.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/RamkathaKiVichitraJhalkiyan_515dda63-3ba5-4304-9fc6-1f88d16cef2f.jpg?v=1749202661"},{"product_id":"ramayan-ki-adbhut-kathaen","title":"Ramayan Ki Adbhut Kathayein","description":"\u003cp\u003eAuthor : Shantilal Nagar\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45127702151358,"sku":null,"price":636.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/ramayankiadbhutkathayen_bbfd5f3e-9398-4774-a62e-8386b644f72d.jpg?v=1749202548"},{"product_id":"ramayan-ki-bhuli-bisri-kathayein","title":"Ramayan Ki Bhuli-Bisri Kathayein","description":"\u003cp\u003eरामकथा का प्रादुर्भाव भारत की पुण्य भूमि पर महर्षि वाल्मीकि द्वारा किया गया। वे एक महान ऋषि तथा महाकवि थे, जो महर्षि बनने से पूर्व एक साधारण व्याध थे, जिनका जीवन नित्य पापाचरण में ही बीतता था। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eएक समय महर्षि नारद तथा ब्रह्मा जी उसी वन में पधारे जिसमें वाल्मीकि का प्रभुत्व था। श्री नारद ने उन्हें 'मरा' मन्त्र का जाप करने को दिया जिसका प्रतिरूप राम था। वाल्मीकि जी ने उस मन्त्र का जाप करते हुए घोर तपस्या की तथा सिद्धि प्राप्त कर सिद्ध पुरुष हो गए। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eइसके पश्चात वे अपने आश्रम में शिष्य भारद्वाज सहित रहकर तपस्या करने लगे। इसी प्रकार सभी भाषाओं की रामकथाओं में अपने क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट देखने को मिलता है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eइतना ही नहीं, अनेक क्षेत्रीय तथा संस्कृत रामकथाओं में अनेक घटनाएँ उनके साथ जोड़ दी गई हैं, जिनका अपना अलग महत्त्व है तथा ऐसी घटनाएँ जन साधारण को विस्मृत हो गई हैं। प्रस्तुत ग्रन्थ ऐसी ही अनोखी घटनाओं पर आधारित है। मैं आशा करता हूँ कि पाठकों को यह कृति रुचिकर लगेगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45127702380734,"sku":null,"price":600.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/ramayan-ki-bhuli-vi.jpg?v=1770883358"},{"product_id":"hanuman","title":"Hanuman","description":"\u003cp\u003eभारत भूमि अनादि काल से ही पुण्य भूमि मानी जाती रही है, जिसमें अनेकों देवी-देवताओं तथा ऋषियों, संतो, युग-पुरुषों तथा दिव्य महर्षियों का जन्म हुआ है जिससे भारतवासी ही नहीं विदेशों के जनमानस भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके।\u003cbr\u003eविश्व में भारत ही एक ऐसी पवित्र भूमि है जिस पर भगवान ने स्वयं ही किसी-न-किसी रूप में अवतार लिया है। कितने ही देवी-देवताओं की अर्चना, वंदना एवं पूजा होती रही है तथा अभी भी होती है। कुछ विभूतियाँ इस धरती पर अनेक वर्षों के पश्चात् लुप्त हो गईं तथा कुछ की अर्चना कुछ ही समय तक रही परन्तु कुछेक विभूतियाँ ऐसी भी थीं जो एक बार भारत की पुण्य भूमि पर प्रकट होने के पश्चात् जन-मानस के ह्रदय पर इस प्रकार छा गई कि उनकी अर्चना-वंदना दिनोंदिन बढ़ती ही गई तथा आज भी इनकी पूजा भारत तो क्या विदेशों में भी विद्यमान है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eहनुमान जी की गणना इन्हीं में की जा सकती है। वे आज कोटि-कोटि भक्तजनों के ह्रदय-स्थलों में निरंतर विद्यमान हैं। हनुमान का चरित्र तथा उनकी वीर गाथाएँ तथा अन्य विशेषताओं का वर्णन कल्पों तक भी नहीं लिखा जा सकता। हनुममान जी के जीवन की पूरी झाँकी प्रस्तुत करने का अकिंचन प्रयास किया गया है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eहमें विश्वास है कि हनुमान की विस्तृत व्याख्या की एक संक्षिप्त झाँकी का दर्शन आप यहाँ अवश्य कर पाएँगे।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45127702708414,"sku":"","price":556.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/hanuman1.jpg?v=1758007163"},{"product_id":"lankapati-rvan","title":"Lankapati Ravan","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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कोई दोष इसमें नहीं देखा जा सकता। कारण, लेखक और पाठक की आस्था अभंग रहती है। विशेषकर दो स्थलों पर अक्षयकुमार जी ने नई उद्भावना से काम लिया है। कैकेयी के राम-वनवास का वर माँगने में भरत-प्रेम से अधिक राम-प्रेम ही कारण दिखाया गया है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eसूत्र यह नई है और मार्मिक है। इसी भाँति रावण में राक्षस की जगह मनीषी मर्यादाशील विद्वान को देखा गया है। कैकेयी और रावण का इन दोनों भूमिकाओं में समीचीन निर्वाह हुआ है और लेखक के लिए यह बधाई की बात है रामचरित्र के प्रेमियों के लिए यह पुस्तक मूल्यवान है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45129112420542,"sku":"","price":440.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/Yug_Purush_Ram.jpg?v=1771405796"},{"product_id":"gita-ki-chamatkari-shiksha","title":"Gita Ki Chamatkari Shiksha","description":"\u003cp\u003eगीता जीवन-सम्बन्धी शास्त्रा है। जीवन को चिन्ताओं और तनावों से मुक्त करके उसे आनन्द से परिपूर्ण कर देना गीता का मुख्य चमत्कार है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eजीवन का दूसरा नाम है, क्रियाशीलता। सारा जीवन विविध प्रकार कर्म करते हुए बीतता है। इन्हीं सामान्य कर्मों द्वारा जीवन में सुख भरने व साथ-साथ ईश्वर से मिला देने का आश्चर्यजनक कार्य गीता ने कर दिखाया है, जीने की कला का नाम गीता है। हमारा मन बहुत चंचल है। इसकी चंचलता दूर करने व चार महत्त्वपूर्ण उपाय गीता ने सुझाये हैं जिनमें समर्पण का तरीका सबसे अध्कि सरल है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eफिर भगवान के साक्षात् दर्शन कराकर हमारा जीवन सार्थक कर दिया है। भगवान के दर्शन असल में गीता का संक्षिप्त संस्करण है। गीता की चमत्कारी शिक्षा समझने के लिए यह अकेला अध्याय ही पर्याप्त है। गीता ऐसी अमूल्य धरोहर है जो घर-घर में पढ़ी जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से गीता की चमत्कारी शिक्षा को सरल भाषा में समझाने का प्रयत्न किया गया है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45129113206974,"sku":"","price":280.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/GeetaKiChamatkariShiksha_3a4d222e-640f-4e32-bfe2-061173cd93c5.jpg?v=1749201806"},{"product_id":"saral-gita-rahasy","title":"Saral Gita Rahasy","description":"\u003cp\u003eप्रस्तुत लघु पुस्तक में कम पढ़े-लिखे व आबाल-वृद्ध मनुष्यों के लिए अत्यंत सरल भाषा में 'गीता' के सार-तत्त्व को देने का अकिंचन प्रयास किया गया है। कतिपय विद्वानों का कहना है कि पूरी 'गीता' में सात श्लोक ऐसे हैं, जो पूरी गीता के सार-तत्व को प्रकट करते हैं। वे सात श्लोक, अध्याय आठ का 'नवाँ' और 'तेरहवाँ' श्लोक, अध्याय ग्यारह का 'छत्तीसवाँ' श्लोक, अध्याय तेरह का 'तेरहवाँ' श्लोक, अध्याय पन्द्रह का 'पहला' और 'पन्द्रहवाँ' श्लोक तथा अध्याय अट्ठारह का पैंसठवाँ श्लोक हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपरन्तु इनके अलावा भी कुछ ऐसे महत्त्वपूर्ण श्लोक हैं जो 'गीता' के मर्म पर विस्तृत प्रकाश उठाते हैं। इस पुस्तक में ऐसे महत्त्वपूर्ण श्लोकों को बीच-बीच में दिया गया है, ताकि पुस्तक की उपयोगिता बनी रहे। पुस्तक का प्रारम्भ धृतराष्ट्र द्वारा उसके मंत्री संजय से युद्ध का हाल पूछने से होता है। संजय को दिव्य-दृष्टि प्राप्त थी। हमारा लक्ष्य है कि 'गीता' का सार सभी धर्मों के व्यक्तियों तक पहुँचे और भारतीय-संस्कृति के इस गौरव ग्रन्थ की उपयोगिता, सभी को जीवन में सद्विवेक के मार्ग पर ले जाने में सहायक हो।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45129115369662,"sku":"","price":316.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/saralgeetarahasyanew.jpg?v=1749201487"},{"product_id":"sampooran-shree-durga-saptshati","title":"Sampuran Shree Durga Saptshati","description":"\u003cp\u003eAuthor : Dr. Vanshidhar Tiwari\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eइसलिए यह अत्यन्त आवाश्यक है कि दोनों जातियों को इसका सुअवसर और प्रोत्साहन दिया जाय कि एक दूसरे के धर्म सम्बंधी विचारों की जानकारी प्राप्त करें। अविद्या और अज्ञान अनेक अनर्थों का कारण हुआ करता है, और आज भारतवर्ष की इस जटिल समस्या के हल करने का एक साधन इस अविद्या और अज्ञान का दूर करना है तो यह इस प्रकार की पुस्तकों के प्रकाशन और प्रचार से दूर हो सकता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45129165308094,"sku":"","price":236.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/kuranaurdharmikmatbhed.jpg?v=1749207091"},{"product_id":"shrivrindavandham-1","title":"Shrivrindavandham","description":"\u003cp\u003eAuthor : Deepak Bisht Shandilaya\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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है यह ‘आत्म-चिन्तन’।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45129170485438,"sku":null,"price":316.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/AtmaChintan_new.jpg?v=1749207880"},{"product_id":"man-ke-char-adhyay","title":"Man Ke Char Adhyay","description":"\u003cp\u003eहम अपनी पहचान में किसी खास मन का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। हम मन को दो विशिष्ट भागों में भी बाँट सकते हैं और चार या चार सौ भागों में भी। मुख्य बात है-मन की पहचान, मन की भूमिका। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eइसी पहचान से लोग हमें जानते हैं कि फलाँ इंटेलेक्चुअल है कि अमुक व्यक्ति कलाकार या संत है। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने मन को या मनुष्य को चार भागों में बाँटकर उन्हें देखने-समझने की कोशिश की है। लेखक की यह कोशिश वैयक्तिक हो सकती है मगर मन निर्वैयक्तिक होता है जैसे ईश्वर। आप ईश्वर को कैद नहीं कर सकते।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eआप मन के पीछे भाग ही सकते हैं। जिस दिन आपको भागने की, इस निरर्थकता का आभास हो जाता है उसी दिन आपके जीवन में ध्यान घटित होता है। ध्यान मनुष्य की प्रकृति है। बच्चे ध्यानी होते हैं। जैसे-जैसे बच्चे बडे होते हैं वे अपनी प्रकृति से दूर होते जाते हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eआप अपनी यात्रा जहाँ से शुरू करें, लौटते वहीं हैं। यदि हम यात्रा (दैहिक) के दौरान अपनी प्रकृति को हमेशा याद रखें तो हमारी पहचान जैसी हो, हम हर परिस्थिति में खुश रह सकते हैं। हमारी खुशी को मन का कोई कटघरा, मन का कोई भेद बाधित नहीं कर सकता। हम अपनी यांत्रिकता में उतने ही शांत दिखेंगे जितने ध्यान में।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45132312019134,"sku":"","price":395.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/ManKeCharAdhyay.jpg?v=1749450320"},{"product_id":"sukh-kya-hai","title":"Sukh Kya Hai?","description":"\u003cp\u003eसुख भोग का विषय है या फिर बोध का? भोग में सुख कामना भर रहता है। आप विविध साधनों से कामना को पुष्ट करते रहिये। आप सफलता का आनंद लीजिए। विवाह कीजिए या फिर सम्मान के पीछे भागिए। एक दिन कामना का आधार यानी शरीर ढह जाएगा। फिर हमारी कामना का, इच्छा-संकल्प का क्या होगा? हम अपनी कामना को पुष्ट करते रहने के लिए बार-बार उसके आधार को गढ़ते रहें अथवा सचेतन तौर पर उन विविधवर्णी साधनों का इस्तेमाल भर करें यही पड़ताल यह पुस्तक करती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45132362711230,"sku":null,"price":360.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/Sukhkyahai.jpg?v=1749450426"},{"product_id":"mahatma-buddh-ke-poorv-janm-ki-rochak-kathayein","title":"Mahatma Buddh Ke Poorv Janm Ki Rochak Kathayein","description":"\u003cp\u003eबौद्ध धर्म में जातक कथाओं का एक विशेष महत्त्व रहा है जिनकी संख्या 550 से अधिक है। यह कथाएँ प्रायः भगवान बुद्ध के पूर्व जन्म से संबंधित हैं तथा प्राचीन काल में यह इतनी लोकप्रिय थीं कि उनको बौद्ध धर्मस्थानों की दीवारों पर खोदा जाता था। भरहुत, साँची, अमरावती, मथुरा तथा गांधार आदि बौद्ध इमारतों तथा स्तूपों में इनकी झलक विशेष रूप से देखी जा सकती है। इन जातक कथाओं में कई विषयों पर प्रकाश डाला गया है। जिनमें मानव चरित्र आदि बहुतायत में प्राप्य है। भगवान बुद्ध इन कथाओं के माध्यम से ही जनसाधारण को उनका भाषण समझाने का प्रयास करते थे। अधिकतर यह कथाएँ पशु-पक्षियों आदि पर आधारित हैं जिसे आम जनता को समझने में आसानी होती थी। उनमें से कुछ कथाओं का संग्रह बाल साहित्य के रूप में प्रस्तुत है। आशा है, पाठकों को रुचिकर होंगे।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45132391678142,"sku":"","price":360.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/MahatamaBuddhakePoorvaJanamKiRochakKathayen.jpg?v=1749456304"},{"product_id":"shirdi-ke-sant-shri-sai-baba-1","title":"Shirdi ke Shri Sai Baba ka Sampoorna Jeevan Charitra","description":"","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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Title","offer_id":45132502302910,"sku":null,"price":320.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/DharmikSanskar_ParvavamSangathan.jpg?v=1749460879"},{"product_id":"vedon-anya-shashtron-tatha-chintakon-ke-anusar-bhakti-kya-hai","title":"Vedon Anya Shashtron Tatha Chintakon ke Anusar Bhakti Kya Hai","description":"\u003cp\u003eपुस्तक में वेदों, उपनिषदों, गीता, रामचरितमानस, बाइबिल तथा स्वामी विवेकानन्द जी के चिन्तन के अनुसार भक्ति क्या है, सरल भाषा में वर्णित है। उपनिषदों, वेदों तथा पातञ्जलयोगदर्शन के अनुसार पुनर्जन्म की प्रामाणिकता सिद्ध की गई है व कुछ भक्तों का संक्षिप्त विवरण भी दिया गया है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eजरा विचार करें, बच्चे खुश रहते हैं। उनका पेट भरा है तो ठीक है। वह माँ पर आश्रित रहते हैं, उन्हें लगता है कि हर समस्या माँ को बता दो और निश्चिन्त हो जाओ। इसी प्रकार हमारा समर्पण भी परमपिता पर हो व हम सहज भाव से स्वयं को परमात्मा को समर्पित करके निश्चिन्त मन से अपने कार्यों को करते रहें तो सदा 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आपकी नैया कभी नहीं डुबती है। यह ज्ञान हर पल आपका मार्ग-दर्शक बन जाता है यदि आप अपने जीवन में उसका प्रयोग करते हैं, लेकिन यदि आप सर्वप्रथम जब अपने ऊपर उस ज्ञान का प्रयोग नहीं करते हैं तो आपकी नैया आपको तारती नहीं है। इस संदर्भ में हम देखें तो यह कहावत उपनिषदों के लिए पूर्णतः ठीक प्रतीत होती है क्योंकि उपनिषद् सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का ऐसा ज्ञान है जिसे व्यक्ति प्राप्त कर आत्मज्ञान से परमात्मज्ञान की प्राप्ति करता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउपनिषद् ही एकमात्र ऐसा ज्ञान-ग्रन्थ है, जो यह प्रमाणित करता है कि पुस्तक में अर्थ नहीं रहता, अर्थ सृष्टि में रहता है। जब यह बात समझ में आ जाएगी तभी सच्चे ज्ञान की पहचान होगी। अतः उपनिषद् वह प्रकाशपुंज है जिसके ज्ञान से आत्मप्रकाश के दीपक से प्रकाशित होते हुए हमें परमात्मा का प्रकाश मिलता हैऔर हम उसके प्रकाश से प्रकाशित होते है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default 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Title","offer_id":45132605948094,"sku":null,"price":796.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/HinduDharamKiAnuthiSanskriti.jpg?v=1749463996"},{"product_id":"hindu-manayton-ka-vaigyanik-aadhar","title":"Hindu Manayton Ka Vaigyanik Aadhar","description":"\u003cp\u003eजहां विज्ञान तर्क, प्रयोग और भौतिक प्रमाणों पर आधारित है, वहीं हिन्दू मान्यताएं (सनातन धर्म) आध्यात्मिक अनुभव, आतंरिक चेतना और नैतिकता पर बल देती हैं। दोनों मिलकर मानवता को भौतिक और आध्यात्मिक विकास की दशा में मार्ग दर्शन करते हैं। हिन्दू मान्यताएँ (सनातन धर्म) गहरे आध्यात्मिक ज्ञान और वैज्ञानिक सिद्धांतों का मिश्रण है, जो वेदों पर आधारित है। इनमें योग, ध्यान, कर्म और आयुर्वेद के माध्यम से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, खगोलीय घटनाओं के प्रति समझ और पर्यावरण संरक्षण के वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। यह परंपराएं न केवल अध्यात्म, बल्कि स्वास्थ्य और जीवनशैली के लिए तर्कसंगत आधार प्रस्तुत करती हैं। उदाहरण के तौर पर घर के आँगन में तुलसी का पौधा लगा होता है। रामभक्त हनुमानजी जब सीता जी की खोज करने लंका गए तो उन्हें एक घर के आँगन से तुलसी का बिरवा दिखलाई दिया।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\"रामायुध अंकितगृह, शोभा बरनि न जाय। नवतुलसिकावृन्द तहँ, देखि हरष कपिराय ।\" अर्थात् अति प्राचीन परम्परा से तुलसी का पूजन सद्गृस्थ परिवार में होता आया है। विष्णु भगवान को श्राद्ध भोजन में, देव प्रसाद, चरणामृत, पंचामृत में तुलसीपत्र होना आवश्यक है। इन सभी धार्मिक मान्यताओं के पीछे एक वैज्ञानिक रहस्य छिपा हुआ है। तुलसी वृक्ष एक दिव्य औषधि वृक्ष है। तुलसी के माध्यम से ज्वर, जुकाम, खाँसी एवं मलेरिया जैसी सामान्य बीमारियाँ तो ठीक हो ही जाती हैं और कई असाध्य बीमारिया भी। पुस्तक में हिन्दू मान्यताओं के वैज्ञानिक आधार पर 101 प्रश्न और उनके सटीक उत्तर दिये गये हैं जो हिन्दू मान्यताओं पर आधारित हैं और आपकी जीवन शैली के लिए अत्यंत ही उपयोगी सिद्ध होंगे।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45132613845182,"sku":null,"price":556.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/HinduManyataonKaVaigyanikAdhaarNEW.jpg?v=1749464185"},{"product_id":"trishool","title":"Trishool","description":"\u003cp\u003eजब-जब धर्म की हानि हुई है, जनमानस का विश्वास धर्म से उठने लगा है अथवा धर्म पर किए गए कुठाराघात से लोगों की धार्मिक आस्था को चोट पहुँची है तब-तब हमारे धर्म के पुरोधाओं धार्मिक पुनर्जागरण का बिगुल बजाकर धर्म की रक्षा की है। ऐसे ही धार्मिक पुनर्जागरण के प्रणेता वाल्मीकि आठवीं सदी में, तुलसीदास सोलहवीं सदी में एवं शिवाअवतार सांईं बाबा उन्नीसवीं एवं बीसवीं सदी में धर्म के उत्थान के लिए वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास रामचरितमानस की रचना की। श्री सांईं बाबा ने समाज में धार्मिक विश्वास जगाकर समाज का मार्गदर्शन किया। इस पुस्तक में इन्हीं तीनों महात्माओं के जीवन चरित पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही अन्य कविताएँ भी हैं जो धार्मिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों को पुनः स्थापित करती 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और जहाँ भी धर्म का पतन होता है और अधर्म की प्रधानता होने लगती है, तब-तब मैं अवतार लेता हूँ।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45132734562494,"sku":null,"price":796.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/YamlokChitraguptaAdalat_e32e9ed5-a5d0-464f-8647-af73581b5580.jpg?v=1749552871"}],"url":"https:\/\/atmarambooks.com\/collections\/religion-mythology.oembed?page=2","provider":"Atma Ram and Sons","version":"1.0","type":"link"}