{"product_id":"asantulit-hota-dakshin-asiayai-shakti-santulan","title":"Asantulit Hota Dakshin Asiayai Shakti Santulan","description":"\u003cp\u003eशीतयुद्ध के बाद की स्थितियों ने दुनिया भर के देशों को नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी विदेश नीतियों को फिर से अनुपस्थित करने को बाध्य कर दिया है। यही बात दक्षिण एशियाई देशों और अपने पड़ोसियों के साथ भारत के संबधों पर भी लागू होती है। शीतयुद्ध काल की पहचान एक ऊँचे दर्जे की भारत-विरोधी भावना के रूप में थी। बहुत हद तक ऐसे अनसुलझे हुए विवादों का कारण था। जिन्होंने छोटे देशों को भारत के साथ अपने व्यवहारों में बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप की तलाश करने को बाध्य कर दिया था। शीतयुद्ध के बाद के दौर में हालाँकि परम्परागत सुरक्षा चिंताएँ कायम हैं लेकिन भारत-विरोधी राग में कमी आई और सभी विवादस्पद मसलों पर बातचीत के प्रति इच्छा दर्शाई जाने लगी है। भारत भी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए तैयार है, बशर्ते वे सीमा पार से संचालित आतंकवाद की वजह से उसकी सुरक्षा चिंताओं के प्रति संवदेन्शील हों। आज के दिन फोक्स क्षेत्रीय एवं उप-क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की ओर है, विशेष रूप से आर्थिक मोर्चे पर। अमेरिका के नेतृत्व में आर्थिक, औद्योगिक एवं सैन्य दृष्टि से मजबूत कुछ देशों का विश्व मामलों पर प्रभुत्व, दिव्धुवीयता की समाप्ति के परिणाम के रूप में सामने आया है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45804545867966,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/asantulit-hota-dakshin-asiayai.jpg?v=1768899313","url":"https:\/\/atmarambooks.com\/products\/asantulit-hota-dakshin-asiayai-shakti-santulan","provider":"Atma Ram and Sons","version":"1.0","type":"link"}