{"product_id":"bharat-ke-pramukh-udyog","title":"Bharat Ke Pramukh Udyog","description":"\u003cp\u003eस्वतंत्रता के समय तक भारत में मुख्य रूप से उपभोक्ता वस्तुएँ के उद्योग ही थे। भारत में इन्हीं से औद्योगिक विकास हो रहा था। इस समय भारतीय उद्योग मुद्रा स्फितिए घटती माँगए आधुनिकीकरण की कमीए पुरानी मशीनेंए कच्चे माल की कमी आदि समस्याओं से जूझ रहे थे।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e फलस्वरुप स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद श्प्रथम औद्योगिक नीतिश् लाई गई। इसे तत्कालीन केंद्रीय उद्योग मंत्री डॉण् श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 6 अप्रैल 1948 ईस्वी को घोषित किया गया था। इस नीति के अंतर्गत भारत में सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र के रूप में उद्योगों को वर्गीकृत किया गया। इससे एक मिश्रित तथा नियंत्रित अर्थव्यवस्था की नींव पड़ी। इसके पश्चात भारत में 30 अप्रैल सन् 1956 ईस्वी को श्दूसरी औद्योगिक नीतिश् लायी गई। इसके अंतर्गत उद्योगों को निजीए सार्वजनिक और संयुक्त क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया। इसके अंतर्गत अवशिष्ट उद्योगों को निजी उद्यम हेतु खुला छोड़ दिया गया। तत्कालीन समय में औद्योगिक विकास की गति धीमी थी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e बेरोजगारी अधिकए औद्योगिक रुग्णताए महँगाई और विदेशी मुद्रा विनिमय के संकट थे।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e इन सभी समस्याओं से निजात पाने के लिए सरकार ने 24 जुलाई 1991 को औद्योगिक क्षेत्र में उदारीकरणए निजीकरण तथा वैश्वीकरण की नीति लायी। इसके अंतर्गत उद्योगों की स्थापना में लाइसेंसिंग प्रक्रिया को अधिक सरल बना दिया गया।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45810896044222,"sku":null,"price":476.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/bharat-ke-pramukh-ud.jpg?v=1768983266","url":"https:\/\/atmarambooks.com\/products\/bharat-ke-pramukh-udyog","provider":"Atma Ram and Sons","version":"1.0","type":"link"}