{"product_id":"hind-mahasagriya-deshon-ke-samrik-samband","title":"Hind Mahasagriya Deshon Ke Samrik Samband","description":"\u003cp\u003eहिंद महासागरीय प्रदेश के संलग्न राष्ट्रों का उपनिवेश स्थापन से पूर्व तथा स्वातंव्योत्तर विविध दृष्टियों से महत्व सर्वविदित हो चुका है। आर्थिक दृष्टि से इस महासागर तथा इसके संलग्न राष्ट्रों में प्राय अगाध बहुमूल्य खनिज, ऊर्जा संसाधन एवं जैव सम्पदा तथा इनका महासागरीय मार्गों\/दूरी को संक्षिप्त करने वाले जलमार्गों द्वारा परिवहन, जो तीव्र गति से प्रगति-पथोन्मुख विश्व के लिए आधारभूत हैं, संपूर्ण विश्व विशेष रूप से विकसित सशक्त राष्ट्रों के आकर्षण का स्रोत्र है। 1970 के दशक से विश्व उर्जा भण्डार के एक बड़े भाग के स्वामी खाड़ी एवं कुछ अफ्रीकी राष्ट्रों का रुख एवं उनकी राजनैतिक अस्थिरता चिंता का विषय होता जा रहा है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान होते हुए ईरान-इराक, इजराइल की आतंकवाद की मेखला से एक नई समस्या का जन्म हुआ है। इस प्रकार अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस तथा फ्रांस सामान्य विश्व जनमत एवं चिंतन की उपेक्षा कर हिंद महासागरीय प्रदेश में अपनी सैनिक शक्ति सुदृढ़ करने में प्रयासरत हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eनिश्चित रूप से इन प्रक्रियाओं से संकट एवं तनाव में क्रमश: वृद्धि हो रही है। कई विद्वानों का तो मत है कि बीसवीं सदी के प्रथम तथा दिव्तीय भाग में अटलांटिक तथा प्रशांत महासागर क्रमश: प्रथम तथा दिव्तीय विश्वयुद्ध के क्षेत्र रहे हैं। इसी सदी (अब 21 वीं सदी) के अंतिम भाग में हिंद महासागर विशेषकर खाड़ी क्षेत्र (अब दक्षिण एशिया भी) तृतीय विश्वयुद्ध का आसन्न रगमंच बन सकता है। अत: यह पक्ष भी विषय की उपादेयता एवं अनिवार्यता को प्रतिष्ठित करता है। इन सब बातों की चर्चा पुस्तक में विस्तारपूर्वक सरल भाषा में की गई है।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45961868837054,"sku":null,"price":476.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/hind-mahasagriya.jpg?v=1769667543","url":"https:\/\/atmarambooks.com\/products\/hind-mahasagriya-deshon-ke-samrik-samband","provider":"Atma Ram and Sons","version":"1.0","type":"link"}