{"product_id":"mudrasfiti-prabandhan","title":"Mudrasfiti Prabandhan","description":"\u003cp\u003eनब्बे के दशक के पूर्वार्द्ध में आर्थिक सुधारों की शुरुआत के फलस्वरूप त्वरित और तीव्र विकास के युग में भारत के प्रवेश के साथ ही सौभाग्य से उस दुखद अध्याय की इति हो गई। नियंत्रणकारी प्रशासकीय उपायों में शिथिलता का भी इसमें विशेष योगदान रहा। इसके बाद भी मुद्रास्फीति के दौर आते रहे हैं, परंतु इनके पीछे कोई विशेष कारण रहा होता है और नीतिगत परिवर्तनों का असर इन पर शीघ्र पड़ने लगता है। परंतु वर्ष 2008-09 के प्रारंभ से ही मुद्रास्फीति का जो दौर इस बार शुरू हुआ है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रारंभिक चरण में इसका कारण था, वैश्विक स्तर पर वस्तुओं और जिन्सों के मूल्यों में अचानक आई तेजी, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में भी दबे पाँव घुस आई थी। अब मुद्रास्फीति में जो वृद्धि हो रही थी, वह जिन्सों की महँगाई के कारण हो रही थी। परंतु इस बार का दबाव घरेलू कारणों से आ रहा था।\u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":46240244367550,"sku":null,"price":396.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/mudrasfiti-prabandhan.jpg?v=1770099869","url":"https:\/\/atmarambooks.com\/products\/mudrasfiti-prabandhan","provider":"Atma Ram and Sons","version":"1.0","type":"link"}