{"product_id":"patrakarita-ke-mool-mantra","title":"Patrakarita Ke Mool Mantra","description":"\u003cp\u003eआज नये पत्रकार उपर्युक्त कारणों से पत्रकारिताई दक्षता और भाषा ज्ञान में इतने कमजोर हो गये हैं कि सब कुछ उल्टा सीधा लिखते रहते हैं। रवि को रवी, रवीन्द्र को रविन्द्र, न्यायालय को न्यायलय, अनधिकृत को अनाधिकृत, पुनरुत्थान को पुनरोत्थान, महाराज को महराज, गिरि को गिरी, दंपति को दंपत्ति, और संन्यास को सन्यास लिखा जा रहा है। ऐसे कितने ही अन्य शब्दों को धड़ल्ले से गलत लिखा जा रहा है। लेकिन लेखन की गुणवत्ता में आ रही गिरावट को तो एक दिन थमना ही होगा। खासकर प्रतिस्पर्धा के इस दौर में ऐसा बहुत शीघ्र होने जा रहा है। अतः नये पत्रकारों को अपनी व्यावसायिक प्रतिभा को निखारना ही होगा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउन्हें जहां से भी ज्ञान मिले, वहां से प्राप्त करना होगा। जिज्ञासु पत्रकारों का मार्गदर्शन करने के लिए यह पुस्तक प्रस्तुत की गयी है। पुस्तक का आद्योपांत गंभीर अध्ययन करने पर पाठकों को उसमें ऐसी जानकारियां अवश्य मिलेंगी, जिनकी बदौलत उनकी लेखनी में चमक आ जाएगी। \u003c\/p\u003e","brand":"Atma Ram and Sons","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":46385679564990,"sku":null,"price":796.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0658\/2154\/0542\/files\/patrkarita-ke-mool.jpg?v=1770707798","url":"https:\/\/atmarambooks.com\/products\/patrakarita-ke-mool-mantra","provider":"Atma Ram and Sons","version":"1.0","type":"link"}