30 Mahan Senanayak Jinhone Vishwa Badal Dala
30 Mahan Senanayak Jinhone Vishwa Badal Dala
Rampal Singh
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किसी भी सैन्य कमांडर में सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता युद्ध के संचालन को प्रभावित करती है। यदि नेतृत्व का निर्णय गलत है तो वह विजय को पराजय में बदल सकता है। उससे सेना व राष्ट्र को हानि हो सकती है। कमांडर को किन परिस्थिति में कठिन निर्णय लेना पड़ रहा है, यह एक जोखिम भरा कार्य है। वह सफल व असफल भी हो सकता है। लेकिन उसे अपने अभ्यास से यह सब कुछ सीखना पड़ता है। कभी-कभी प्रतिकूल परिस्थिति में शांत रहना पड़ता है। यह सब युद्ध संचालन का हिस्सा है। सैन्य कमांडर को युद्ध संचालन करने से पूर्व अनेक बार सोचना पड़ता है कि आज युद्ध प्रारम्भ करने का क्या निर्णय होगा। अतः वह अपनी सूझ-बूझ से उस प्रतिकूल समय को युद्ध टालने में लगाता है। इसके लिए सैन्य कमांडर को अपने निर्णय पर अडिग रहना पड़ता है। उस पर कायरता का भी आरोप लग सकता है, लेकिन देश व सेना का सम्मान सर्वोपरि है। जैसा कि जनरल मानेकशॉ ने सन् 1971 के युद्ध में बडे स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से युद्ध लड़ने से मना कर दिया था। किसी कमांडर का यह कहना कि मैं युद्ध नहीं लखूँगा, सैन्य इतिहास में सबसे पहला उदाहरण है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि अगर मैं सन् 1962 में सैन्य कमांडर हुआ होता और आपके पिता पं. जवाहरलाल नेहरू, जो उन दिनों प्रधानमंत्री थे, मुझे युद्ध करने को कहते तो मैं उनको इसी प्रकार मना कर देता। उनका कहना था कि मैं एक सैनिक हूँ मेरा काम युद्ध लड़ना है, वह भी जीतने के लिए न कि हारने के लिए।
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Rampal Singh
