Aahen Aur Muskan-I
Aahen Aur Muskan-I
Vimla Raina
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समाज की रूढ़िवादी मान्यताओं तथा मनुष्य की व्यक्तिगत उलझनों पर प्रकाश डाल, समाज तथा मानव को प्रभावित करने की क्षमता सबसे अधिक नाटक में है। उपन्यास पढ़ा जाता है, कविता और कहानी पढ़ी जाती हैं पर नाटक में जीवन की झाँकी हँसती-बोलती, रोती-गाती, आँखों के सामने इस तरह प्रस्तुत की जाती है जैसे अभी ही कोई घटना घटी हो जिसमें दर्शक भी सम्मिलित हों और उन्होंने भी सब कुछ सुना हो, सब कुछ देखा हो, सब कुछ समझा हो और पात्रों का सुख-दुख अनुभव किया हो। कहानी, कविता, उपन्यास और नाटक के प्रभावों में वही अन्तर है जो कि एक पढ़ी-पढ़ाई और सुनी-सुनाई तथा अपनी ही घटनाओं में होता है। सामाजिक, एतिहासिक, हास्य तथा व्यंग्यात्मक नाटकों का संग्रह है ये पुस्तक जो दो खण्डों में प्रकाशित है।
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Binding
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Hard Cover
Author
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Vimla Raina
