Abhinav Hindi Vyakaran
Abhinav Hindi Vyakaran
Dr. M.K.Mishra
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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में रहकर वह अपने विचार दूसरों तक पहुँचाना चाहता है और दूसरों के विचार स्वयं समझना चाहता है। लोगों के बीच होने वाला विचारों का यह आदान-प्रदान ही 'सम्प्रेषण' कहलाता है। हम लोग भी अपनी बातें दूसरों तक सम्प्रेषित करने के लिए कभी इशारे या अस्पष्ट ध्वनियों का सहारा लेते हैं तो कभी ताली बजाकर अपनी बात कह देते हैं, किन्तु मनुष्य सम्प्रेषण के लिए सबसे अधिक जिस माध्यम का सहारा लेता है, वह है 'भाषा'। 'भाषा' मनुष्य के पास एक ऐसा साधन है जिसके माध्यम से वह समाज के अन्य लोगों से भावों और विचारों का आदान-प्रदान करता है। 'भाषा' मनुष्य के मुख से उच्चारित होती है। वास्तव में हम तरह-तरह की ध्वनियों का उच्चारण करते हैं। इन ध्वनियों के परस्पर मेल से शब्द इस प्रकार बनते हैं, जैसे- 'क', 'म' तथा 'ल' ध्वनियों के संयोग से हम 'कमल' शब्द बना सकते हैं, किन्तु इन्हीं ध्वनियों से बनने वाले 'मकल' या 'लकम' शब्दों को हम हिन्दी भाषा के शब्द नहीं कह सकते, अर्थात् भाषा में केवल सार्थक अथवा अर्थवान शब्द ही मान्य होते हैं, निरर्थक नहीं। दूसरे, 'कमल' शब्द से कमल के फूल का अर्थ हमारे मन में जगता है। 'क', 'म' तथा 'ल' ध्वनियों से बना शब्द 'कमल' जो वस्तुतः 'वस्तु' कमल के फूल का प्रतीक है। वास्तविक वस्तु 'कमल का फूल' तथा उसका अर्थ तो हर भाषा-भाषी के लिए समान होता है, अंतर केवल प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के स्तर पर ही होता है, जैसे- वस्तु और उसके अर्थ को व्यक्त करने के लिए संस्कृत भाषा-भाषी उसे 'जलज' कहता है तो हिन्दी भाषी 'कमल' तथा अंग्रेजी भाषी 'लोटस'।
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Product Details
Language
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- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392684012
Binding
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Hard Cover
Age Group
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- All Age Groups
