Adhunik Mahilaon ki Soch
Adhunik Mahilaon ki Soch
Rajender Pandey
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महिलाएँ कर्मठ, मेहनती, ईमानदार और अपने कर्तव्यों के प्रति अत्यंत ही संवेदनशील होती हैं। उनकी परवरिश लड़कों की तरह ही अभिभावक करते हैं तो वे अपनी पूरी ऊर्जा, शक्ति और बुद्धि के साथ बड़ी होती हैं, फिर उनका संपूर्ण रूप से विकास होता है और वे जिस क्षेत्र में जाती हैं, उस क्षेत्र में संपूर्ण रूप से उन्नति प्राप्त करती हैं और कोई भी कार्य उनके लिए असंभव नहीं होता है। महिलाओं के रास्ते का रोड़ा पुरुष प्रधान समाज अक्सर ही बनता है, उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित और हतोत्साहित कर बाहर के कार्यों से जुड़ने नहीं दिया जाता है, जबकि यह मूलतः गलत है क्योंकि महिलाओं की उन्नति के बिना परिवार, समाज और देश की उन्नति किसी भी कीमत पर संभव नहीं है। पुरुष प्रधान समाज में स्त्री जन्म लेती है और पुरुष प्रधान समाज में बड़ी भी होती है, जिससे उसके साथ स्वाभाविक रूप से भेदभाव होता है। इस भेदभाव के कारण उसकी ऊर्जा, शक्ति, साहस और प्रतिभा का विकास पूरी तरह से हो ही नहीं पाता है, अभिभावकों का यह काम है कि वे बाल्यावस्था से ही उन्हें उनकी असीमित शक्तियों से अवगत कराते रहें, उनके साथ कोई भेदभाव न करें और लड़कों की तरह ही लाड़-प्यार-भरे माहौल में उनकी परवरिश करें ताकि उनकी ऊर्जा का संपूर्ण रूप से विकास हो।
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Rajender Pandey
