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Agni-Purush

Agni-Purush

Dr. Bhagwati Saran Mishra

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मंथन डॉ. अरविन्द अरोड़ा 'मुक्त' का नवीनतम् उपन्यास है। इस उपन्यास में ढलते हुए सामन्तवाद और उभरते हुए पूंजीवाद की गाथा है। राजनीतिक परिप्रेक्ष में लिखा गया यह उपन्यास राजनीतिज्ञों द्वारा अपनाए जाने वाले हथकण्डों को उजागर करता है। इसके अलावा डाकू समस्या पर भी मंथन करता है। राजनीति में काले धन की ताकत को बताता है। कहा गया है जब पाप का घड़ा भर जाता है तब उसे फोड़ने को ईश्वर खुद अवतरित होते हैं। ईश्वर ही सत्य है, सत्य ही ईश्वर है। सत्य की ताकत के आगे काले धन की ताकत कमजोर पड़ जाती है। जनता जनार्दन ही सत्य है। जनता जनार्दन के आगे काला धन वालों की भी नहीं चलती। जनता की जागरूकता राजनीति को अपने लक्ष्य तक पहुंचाती है। यह इस उपन्यास का सारतत्व है। आशा है कि मुक्त जी के अन्य उपन्यासों की तरह पाठक इस उपन्यास को चाव से पढ़ेंगे और वर्तमान समाज की स्थिति पर मंथन करेंगे। इस उपन्यास को पढ़ने में सदा उत्सुकता बनी रहती है कि आगे क्या होगा।

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Hard Cover

Author

Dr. Bhagwati Saran Mishra

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