Arthik Apradh Aur Bhartiya Police Vyvstha
Arthik Apradh Aur Bhartiya Police Vyvstha
V.S.Baghel
SKU:
तेजी से बढ़ते वैश्वीकरण के दौर ने वैश्विक आर्थिक अपराधों में वृद्धि की है। आर्थिक अपराधों के पारम्परिक स्वरूपों जैसे भ्रष्टाचार एवं गबन में इंटरनेट जैसी प्रौद्योगिकियों ने आग में घी डालने का काम किया है। आज अपराध के नए-नए स्वरूप हमारे सामने आ रहे हैं, जिनमें मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, नकली मुद्रा, वित्तीय घोटाले, धोखाधड़ी, धनशोधन, हवाला लेन-देन एवं कंप्यूटर संबंधी अपराध प्रमुख हैं। ये अपराध देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही हानिकारक प्रभाव डालते हैं। इन अपराधों से निपटना पुलिस बलों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। औद्योगीकरण, बाजारीकरण एवं भूमंडलीकरण ने भारतीय समाज के ताने-बाने को प्रभावित किया है। आजादी के बाद भारतीय समाज में बड़े पैमाने पर राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन हुए हैं। आज का अपराधी कुछ दशकों पहले के अपराधी से पूर्णतया भिन्न हो चुका है। जहां कुछ वर्षों पहले का अपराधी मुंह पर गमछा बांधकर मीलों पैदल चलकर रात होने पर डकैती डालता था, वहीं आज परिवहन की सुख-सुविधाओं में वृद्धि एवं इंटरनेट का विकास होने से अपराधी देश या विदेश में कहीं पर भी बैठे-बैठे साइबर अपराध को अंजाम दे सकता है। आज आर्थिक अपराध न केवल व्यक्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं, परन्तु राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।
Couldn't load pickup availability
Share
Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392605826
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
