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Atmakatha: Ramprasad 'Bismil''
Atmakatha: Ramprasad 'Bismil''
Banarasi Das Chaturvedi
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यह आत्मकथा गोरखपुर जेल की फाँसी की कोठरी में फाँसी पर झूलने के तीन दिन पहले तक अधिकारियों की नजर बचाकर लिखी गई थी। उन्हीं के शब्दों में- इस कोठरी में यह सुयोग्य प्राप्त हो गया कि अपनी कुछ अंतिम बात लिखकर देशवासियों को अर्पण कर दूँ। संभव है कि मेरे जीवन के अध्ययन से किसी आत्मा का भला हो जाए। बड़ी कठिनता से वह शुभ अवसर प्राप्त हुआ। महसूस हो रहे हैं बादे फना के झोंके, खुलने लगे हैं मुझ पर असरार जिंदगी के। यदि देश हित मरना पड़े मुझको अनेकों बार भी, तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाऊँ कभी, हेईश ! भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो, कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कम हो।
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Banarasi Das Chaturvedi
