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Avchetan Man Ki Shakti

Avchetan Man Ki Shakti

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हम लोग सारा दिन जागृत अवस्था में जो कर्म करते हैं, उसका प्रभाव चेतन मन के नीचे दबी अवचेतन मन की परतों पर भी पड़ता है। आदमी जब कोई बुरा कर्म करता है तो बाद में उसे उस कर्म का पछतावा (प्रायश्चित) होता है। ऐसा माना जाता है कि यह पछतावा आदमी की अंतर्रात्मा का होता है लेकिन सच बात तो यह कि आदमी का अवचेतन मन जब महसूस करता है कि उसके जरिए कुछ गलत हुआ है, ऐसा नहीं होना चाहिए था। चेतन मन के नीचे दबे रहने पर भी उसे अन्याय या असत्य के खिलाफ अपनी आवाज उठानी चाहिए थी तो आदमी का चेतन मन इस अवचेतन मन के प्रभाव से पश्चाताप से भर जाता है। कई दार्शनिक यह मानते हैं कि अवचेतन मन केवल रात को सपनों में ही सक्रिय रहता है। दिन में या जागृत अवस्था में वह एकदम सुषुप्त या सोया हुआ रहता है। लेकिन यह सच नहीं है। अवचेतन मन पत्थर की तरह ऐसा जड़ या अवचेतन नहीं होता कि दिन-भर के क्रिया-कलापों का उस पर असर ही पड़े अथवा वह उन कर्मों से किसी प्रकार का प्रभाव ही ग्रहण नहीं कर पाए।

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