Bacche Kyun Bigadte Hain
Bacche Kyun Bigadte Hain
Rajender Pandey
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बाल-मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों को कभी भी हल्के नहीं लेना चाहिए। बच्चों पर अपनी इच्छाएँ, अपनी पसंद और अपने विचार जब अभिभावक थोपने की कोशिश करने लगते हैं तो बच्चे उनसे जी चुराने लगते हैं, उनके सामने आने से कतराने लगते हैं और जैसे-जैसे बड़े होते हैं, वैसे-वैसे उनसे नफरत करने लगते हैं। बच्चों की पसंद को समझकर उनको चीजे मुहैया करवाएँ ताकि वे उन्हें इस्तेमाल कर सकें। जब बच्चों के आदर्श उनके मम्मी-पापा नशेड़ी हैं, झूठे हैं और चरित्रहीन हैं तो फिर बच्चों को बिगड़ने से वे कैसे रोक सकते हैं और वे राकेंगे तो बच्चों के मुख से सुनेंगे कि तुम क्यों पी रहे हो? आजकल बच्चों को सबसे ज्यादा स्मार्ट फोन बिगाड़ रहा है, इसके बाद नशा बिगाड़ रहा है, फिर माडर्न विचारों वाले मम्मी-पापा के रोमांटिक और अमर्यादित रिलेशनशिप भी बच्चों को बिगाड़ रहा है। बच्चों के सामने झूठ बोलोगे तो बच्चा तो झूठ बोलना सीखेगा ही। अतः सबसे पहले स्वयं को अनुशासित करें, झूठ बोलना बंद करें, बेईमानी करना छोड़े और अपने उसूलों का पालन करना शुरू कर दें ताकि बच्चे आपकी नकल करें तो स्वाभाविभक रूप से उनमें वे उपरोक्त अच्छाइयाँ उत्पन्न हो जाएं। पुस्तक में बच्चों के बिगड़ने के कारण और उनके समाधान सरल भाषा-शैली में दिए गये हैं ताकि उनपर अमल कर अपने बच्चों को बिगड़ने के बजाय उनका भविष्य संवारे।
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Rajender Pandey
