Badmash Haathi
Badmash Haathi
Amit Kumar
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उन्होंने एक घटना का जिक्र करके अपनी बात को पुष्ट करने का प्रयास किया। वे बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में प्रहरी का कार्य करते थे। उन दिनों युवा होती एक बाघिन जिसका नाम प्रहरियों ने चंपा रखा था, एक नर चीतल का शिकार करते हुए चीतल के सींग से उसकी बायीं आँख में गंभीर चोट लग गयी। कुछ दिनों तक तो वह दिखी नहीं। जब दिखी तो वह सामान्य तो थी लेकिन उसकी हर गतिविधि दायीं ओर ही होती थी। बहुत बाद में उन प्रहरियों को पता चला कि वह बायीं आँख से पूरी तरह अंधी हो चुकी है। लगभग एक वर्ष बाद वह प्रजनन योग्य हो गयी तो एक अनुभवी और मजबूत कद-काठी के बाघ के साथ मिलन करके तीन बच्चे की माँ बनी। इसमें से एक मादा और दो बच्चे नर थे। बच्चे जब एक-डेढ़ साल के हो गये तो माँ से शिकार के गुर सीखने लगे। चूंकि माँ बायीं आँख से अंधी थी इसलिए वह सदैव दायें ओर के शिकार पर ही ध्यान केंद्रित करती थी। भले ही बायीं ओर खड़ा शिकार कितना भी आसान क्यों न हो। उसका यह व्यवहार उनके बच्चों ने भी पकड़ा और धीरे-धीरे उनके दिमाग में यह धारणा बैठ गयी कि शिकार अपनी दायीं ओर का ही करना चाहिए। युवा होकर जब तीनों बच्चे स्वतंत्र जीवनयापन करने लगे तब भी वे केवल अपनी दायीं ओर के शिकार को ही निशाना बनाते थे। शिकार के दौरान किसी झुण्ड पर आक्रमण के समय किसी एक पर ध्यान केंद्रित करके जब वे लक्षित शिकार की ओर बढ़ते और शिकार यदि बायीं और भागता तो वह उनको नहीं खदेड़ते थे। लक्षित शिकार यदि दायीं तरफ भागता तब ही वह उसका शिकार करते थे।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789372695007
Binding
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Hard Cover
Age Group
Age Group
- All Age Groups
No. of pages
No. of pages
144
Book Dimension
Book Dimension
22.5x 15cm x 2.5
Item Weight
Item Weight
292 grams
