Bhagwan Shrikrishan
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भारत एक धर्म प्रधान देश है जिस पर अनेक देवी-देवताओं का समय-समय पर, मानव जाति को कष्टों से परित्रण/उद्धार के लिए अवतरण होता आया है। उनमें से कुछेक कुछ समय तक अपना ज्ञान लोगों में बाँट कर उन्हें मानसिक तथा शारीरिक सुख की उपलब्धि करवाते रहे तथा कुछ ऐसे थे जो समय के साथ ही अतीत में विलीन हो गए। परन्तु कुछ ऐसे भी थे जिनका एक बार इस धरती पर प्रादुर्भाव हुआ तो वे जन-जन के हृदय-पटल में सदा सर्वदा के लिए ही विराजमान हो गए तथा जनमानस उन्हें युगों-युगों तक अपने हृदय स्थल में एक प्रेरणा स्त्रोत की भाँति भक्तिपूर्वक आराधना करता रहा। भगवान श्रीकृष्ण भी उन दिव्य विभूतियों में से एक हैं जिनकी जनमानस ने अपने इष्टदेव के रूप में सदैव आराधना की है। कोई ऐसा प्राचीन ग्रंथ नहीं जिसने उनकी अर्चना किसी-न-किसी रूप में न की हो! उनकी महिमा तो आज प्रत्येक वैष्णव गृहस्थ के घर में गाई जा रही है। भारत भूमि के अनेक ग्रंथ उन सर्वशक्तिमान परब्रह्म परमेश्वर का गुणानुवाद करते हैं तथा उनकी महिमा कई जन्मों में भी गाई नहीं जा सकती। उनकी महिमा तो बौद्ध तथा जैन ग्रंथों ने भी भक्तिपूर्वक गाई है। फिर भी यह एक छोटी-सी हपुस्तक भगवान कृष्ण के जीवन काल की घटनाओं से सम्बन्धित तैयार की है, जो संक्षिप्त होते हुए भी आशा है कि पाठकों के लिए रुचिकर होगी।
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