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Bhakt Shiromani Prahlad

Bhakt Shiromani Prahlad

Dr. Lalbahadur Singh Chauh

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भक्त प्रहलाद, असुर राजा हिरण्यकश्यप और कयाधु के चार बेटों में सबसे बड़े थे। प्रह्लाद विष्णु के भक्त थे, जबकि उनके पिता हिरण्यकश्यप ने खुद को भगवान घोषित कर दिया था। हिरण्यकश्यप ने अपने राज्य में विष्णु की पूजा करने पर रोक लगा दी थी। परन्तु बालक प्रह्लाद ने अपनी अविचल भक्ति के बल से अपने सारे कुल को पवित्र कर दिया और भक्तों के लिए भगवान की भक्ति का मार्ग प्रशस्त कर संसार में अपना नाम अमर कर दिया। उसी का फल है जो हजारों-लाखों वर्षों से धर्म-प्राण भक्तराज प्रह्लाद का पवित्र चरित्र लोग प्रेम और सम्मान के साथ पढ़ते सुनते रहे हैं और भविष्य में भी इसी प्रकार अनन्त काल तक अविरल उनकी प्रशंसा अलौकिक महिमा के गीत गाते रहेंगे। इसे ही मनुष्य का जन्म सफल होना कहते हैं। अन्यथा दिन-प्रतिदिन सहस्त्रों प्राणी इस जगत में जन्म लेते हैं और फिर जीवन व्यर्थ ही गंवा परलोकगामी भी हो जाते हैं और उनका आगमन कोई नहीं जान पाता, वैसे ही उनका प्रस्थान भी नहीं जानता। ऐसा जन्म होना और होना समान ही है। 'भक्त शिरोमणि प्रह्लाद' पुस्तक पाठकगण को भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित करेगी और उनका जीवन सहज-सरल और सफल बनेगा। ऐसा विश्वास है।

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Regular price INR. 280
Regular price INR. 350 Sale price INR. 280
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ISBN

978-93-91859-65-7

Binding

Hard Cover

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