Bharat Ke Pranacharya
Bharat Ke Pranacharya
Kaviraj Ratnakar Shastri
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सन 1916 ई. तक जनता में भारत के प्राणाचार्यों का परिचय नहीं के बराबर था। कोई धन्वन्तरि को पुरुष कहता कोई स्त्री। आत्रेय पुनर्वसु (दत्तात्रेय) केवल मन्दिरों के देवता थे।
नागार्जुन एक जादूगर। जीवक का नाम भी पता न था। गुरु परम्परा में प्राणाचार्यों के बारे में कुछ किम्वदन्तियाँ थीं। तर्क और आलोचनाएँ विद्रोह माने जाते थे। किन्तु संहिताओं में प्राणाचार्यों का आग्रह यह है कि जिस विद्या को जीवित रखना हो उसमें विचार-मन्थन होना चाहिए।
बिना आलोडन सार नहीं मिलता। वे उच्चकोटि के प्राणाचार्य तो थे ही उच्चकोटि के लेखक भी। उन्होंने लेखकों को शैली दी और प्राणाचार्यों को जीवन विज्ञान। इस ग्रन्थ में भारत के नौ प्राणाचार्यों के जीवन चरित्र हैं, जिनका परिचय मिल सका-
1. अश्विनीकुमार
2. धन्वन्तरि
3. सुश्रुत
4. आत्रेय पुनर्वसु
5. कश्यप
6. जीवक
7. चरक
8. नागार्जुन
9. वाग्भट
प्राणाचार्य संज्ञा आत्रेय की दी हुई है। इसमें विज्ञान और आचार दोनों हैं। अन्य प्राणाचार्यों की सूची परिशिष्ट में दी गई है। उनका परिचय प्राप्त करना भविष्य के लिए छूटा हुआ है। संहिताओं के स्वाध्याय ने अनेक मान्यतायें एवं अतीत के सत्य ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में सिद्ध कर दिये और पाश्चात्य लेखकों की अनेक भ्रांत धारणाएँ निर्मूल कर दीं। तो भी मानना होगा इस दिशा में विनावरण इतिहास और पुरातत्त्व के प्रकाश में किया गया है। स्वर्ग और नरक की ऐतिहासिक और भौगोलिक सत्यता के बारे में अब भ्रांति नहीं रहनी चाहिए। 'भारतीय जीवन में इतिहास का स्थान एवं स्वर्ग और नरक का भूगोल- इतिहास' अध्याय विशेष रूप से भारत सरकार के निर्देश पर ही लिखे गए ताकि वह विषय स्पष्ट हो। मेरी पत्नी ब्रह्मादेवी जी एम. ए. का आग्रह है कि यह ग्रंथ आयुर्वेदिक ही नहीं प्रत्युत ऐतिहासिक, दार्शनिक और साहित्यिक भी है। वह जो भी है, पाठकों की सेवा में प्रस्तुत है। प्रत्येक कला के प्रति दर्शकों का दृष्टिकोण भिन्न हो सकता है। अब इतिहास और पुरातत्त्व में होड चल रही है। नये-नये तथ्य गुम्फित करना ही राष्ट्र के देवता की पूजा है। परिशिष्ट में पारिभाषिक शब्दों में परिचय भी दिए हैं और वे भी अन्तर्राष्ट्रीय भाषा में। भारत सरकार ने यह ग्रंथ अनेक निर्णायकों के पास भेजा। अन्यतम निर्णायक पं. शिवशर्मा जी आयुर्वेदाचार्य ने लिखा-"In publishing the treatise the Government will be offering to the nation a fascinating informative historical and scientific work of great merit." - लेखक
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789391859718
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
