Bharat Ki Saamudrik Kootniti
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पिछली कई शताब्दियों का इतिहास बताता है कि हिन्द महासागर दो दुनियाओं (पूरब और पश्चिम) को जोड़ने में एक सेतु, अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से 'हाइवे' और सामरिक लिहाज से वृहत्त रणनीतिक क्षेत्र के रूप में प्रतिष्ठित रहा है। इस स्थिति में यह आवश्यक हो जाता है कि विश्व-व्यवस्था में यदि किसी देश को अग्रिम पंक्ति में रहना है, तो उसे महासागरीय कूटनीति (ओसियन डिप्लोमेसी) में सफल प्रतियोगी बनना होगा। अब पहला सवाल यह कि भारत इस प्रतियोगिता में स्वयं को कहाँ पा रहा है? और दूसरा यह कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश एवं विश्व की अपेक्षाओं को पूरा करने में सफल हो पा रहे हैं। संभवतः यह पहली बार हुआ है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने समुद्रतटीय देशों के साथ सम्बन्ध मजबूत करने की शुरुआत की है। अब भारत ने हिन्द महासागर की बढ़ती अहमियत को रेखांकित करते हुए समुद्र की रणनीतिक-कूटनीति को महत्त्व देना प्रारंभ कर दिया है। वास्तव में यदि यह कूटनीति उन सभी आयामों को संयोजित कर ले, जिनके द्वारा बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में द्वीपीय देशों को एक कोमन प्लेटफार्म पर लाया जा सके, तो भारत अपने पक्ष में रणनीतिक संतुलन बनाने में कामयाब हो जाएगा। यह स्थिति भारत को 21वीं सदी में निर्मित हो रही नई विश्व-व्यवस्था में निर्णायक भूमिका दिला देगी, लेकिन यदि असफल हुआ तो स्थितियों काफी प्रतिकूल साबित होंगी।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392708138
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
208
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 2 cm
Item Weight
Item Weight
480 grams
