Bharat Mein Angrezi Raj 1757-1857
Bharat Mein Angrezi Raj 1757-1857
Richa Choudhry
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विश्व के इतिहास में इससे अपमान- जनक बात और क्या हो सकती है कि हम खुद ही गुलामी के हिमायती हो गए अन्यथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सरकार सन् 1857 ई. में समाप्त हो गई होती और ब्रिटिश सरकार को भारत में शासन करने का अवसर ही न मिला होता। क्रान्तिकारियों का संगठन प्रशासनीय था फिर भी लाखों भारतवासी अपने देशवासियों के विरुद्ध तरह-तरह से अंग्रेजों को सहायता दे रहे थे। रसल लिखता है- 'फिर भी हमें यह स्वीकार करना पड़ता है कि अंग्रेज चाहे कितने भी बहादुर क्यों न हो, यदि सब के सब भारतवासी पूरी तरह हमारे विरुद्ध हो जाते तो भारत में कहीं अंग्रेजों का निशान तक बाकी न रह जाता। हमारे किलों के भीतर ही सेनाओं ने जिस तरह जी तोड़कर अपने स्थानों की रक्षा की, वह निस्संदेह वीरोचित थी। किंतु इस वीरता में भारतवासी शामिल थे और उन्हीं की सहायता और उपस्थिति के कारण उन स्थानों की रक्षा करना हमारे लिए संभव हो सका। यदि पटियाला और जींद के राजा हमारे साथ मित्रता न दर्शाते और यदि सिख हमारी पलटनों में शामिल न होते और उधर पंजाब को शांत न रखते तो हमारा दिल्ली पर आक्रमण व कब्जा करना असंभव था।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392608384
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
