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Bharat Pak Aur Cheen Ki Raksha Vyvstha Ka Tulnatmak Vishleshan

Bharat Pak Aur Cheen Ki Raksha Vyvstha Ka Tulnatmak Vishleshan

S.S. Kushwah

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1960 के दशक में जब चीन में माओ की सांस्कृतिक क्रांति अपने चरम पर थी, तब उसने बाकी दुनिया से खुद को बिल्कुल अलग-थलग कर लिया था, लेकिन उसने सिर्फ एक देश यानी पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बहाल रखे थे। चीन-पाकिस्तान के रणनीतिक गठजोड़ की जड़ें काफी गहरी हैं और इससे हटिंगटन की बात सही साबित होती है। अमेरिका के जाने-माने पॉलिटिकल साइंटिस्ट सैमुअल फिलिप्स हटिंगटन ने द क्लैश ऑफ सिविलाइजेशंस : द रीमेकिंग ऑफ वर्ल्ड ऑर्डर यानी 'सभ्यताओं के टकराव : नई वैश्विक व्यवस्था के निर्माण' में लिखा था, 'संस्कृति और सांस्कृतिक पहचान, जो बड़े स्तर पर सभ्यता के प्रतीक हैं, द्वितीय विश्व-युद्ध के बाद के दौर में ये समाज में जुड़ाव और बिखराव के पैटर्न को शक्ल दे रहे हैं।' हटिंगटन की थ्योरी के मुताबिक, संस्कृति और साझे मूल्यों की वजह से मुस्लिम समाज में एकजुटता है। उन्होंने संस्कृति और सत्ता के संबंध की ओर भी ध्यान दिलाया था। हटिंगटन ने दावा किया था कि चीन और इस्लामिक संस्कृतियों के बीच रिश्ते बनेंगे। उनकी यह बात आज भारत-पाक और चीन के सम्बन्ध में सच साबित हो रही है।

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Author

S.S. Kushwah

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