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Bharat Par Videshi Aakraman

Bharat Par Videshi Aakraman

Rampal Singh

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पुरु ने सिकन्दर से उसी भाव से भेंट की, जिस भाव से एक वीर दूसरे वीर से परस्पर शक्ति संतुलन के बाद मिलता है। बातचीत भी पहले सिकन्दर ने शुरू की थी। सिकन्दर ने पुरु से पूछा कि वह उसके साथ कैसा व्यवहार करे! पुरु ने अत्यन्त निर्भीकता और गर्व से सिर ऊँचा करके कहा- 'एक राजा की तरह'। इसके बाद सिकन्दर ने पुनः पूछा कि उसकी कौन-सी इच्छा है जिसकी पूर्ति वह सिकन्दर से चाहता है। यह प्रश्न पुरु को कुछ अप्रिय तथा प्रतिष्ठा के प्रतिकूल जान पड़ा। अतएव केवल यही कहा कि उसकी सम्पूर्ण इच्छा यही है कि सिकन्दर उसके साथ वही व्यवहार करे जो एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है। इस पर सिकन्दर बहुत प्रसन्न हुआ और उसने उसका राज्य ही नहीं लौटाया प्रत्युत स्वविजित प्रदेश का भी कुछ अंश लौटा दिया। ठीक बात तो यह है कि सिकन्दर का पुरु के प्रति उदार होना उसके लिए एक सामरिक अनिवार्यता थी। परस्पर शक्ति संतुलन से सिकन्दर को यह आभास हो गया था कि युद्ध में पुरु अजेय नहीं तो दुर्जेय तो अवश्य ही है। फलतः उसने यही सोचा कि यदि वह मित्रता आदि का स्वाँग रचकर पुरु पर काबू पा लेता है तो शेष भारत को वह सरलतापूर्वक विजय कर लेगा।

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Regular price INR. 796
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392681226

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults

No. of pages

408

Book Dimension

22.5 cm x 15 cm x 2.8 cm

Item Weight

560 grams

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