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Bharat Sangam

Bharat Sangam

Arun

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भारत में अनेक संस्कृतियों की धाराएँ बहीं। पिशाच, किरात, नाग, यक्ष, असुर, देव, दैत्य, दानव, मानव और राक्षस जातियाँ यहाँ पनपीं और उन्होंने अपने कुल और धर्म को विकसित किया। धीरे-धीरे ये जातियाँ परस्पर सम्पर्क में आईं। और उस प्रारम्भिक युग में अजनबी का सम्पर्क शत्रुता ही उत्पन्न करता था या भय। आपस के युद्धों में सर्वाधिक शक्तिशाली जाति ने कुछ जातियों को अधीन कर लिया या अन्य जातियों को अपने विरुद्ध मित्र बनने पर मजबूर किया। इस प्रकार दशाब्दियाँ बीत गईं और शत्रुता के कारण अधीनता और भय के कारण मित्रता के फलस्वरूप सम्पर्क बढ़ा। एक-दूसरे के जीवन, समाज और धर्म के प्रति ज्ञान बढ़ा। शताब्दियाँ बीतने पर उन्होंने एक-दूसरे के साथ-साथ इस भू पर रहना स्वीकार किया। तभी प्रलय हुई। तीव्र वर्षा से बाढ़ आने पर साँप और मेंढक वृक्ष की एक ही डाली पर आश्रय ले लेते हैं, फिर ये तो समान प्राणी थे। हिमालय के ऊँचे स्थानों पर इन्होंने शरण ली और समस्त संस्कृतियों का संगम हो गया।

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Author

Arun

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