Bhartiya Mudra Ki Vikas Gatha
Bhartiya Mudra Ki Vikas Gatha
Dr. Virendra Singh Baghel
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भारतीय रुपये के लिए 15 जुलाई, 2010 का दिन एक ऐतिहासिक दिल कहलायेगा। इसी दिन भारतीय रुपये को भी विश्व की अन्य प्रमुख मुद्राओं की भाँति अलग पहचान मिली। डॉलर, यूरो, पौंड और येन की तरह जब रुपये को भी नया प्रतीक मिल गया। रुपये का नया प्रतीक देवनागरी लिपि के ‘र’ और रोमन लिपि के ‘आर’ को मिलाकर बना है। अभी तक रुपये की अभिव्यक्ति विभिन्न भाषाओं से अलग-अलग संक्षिप्तक्षरों में की जाती थी। पुस्तक का प्रमुख उद्देश्य पाठकों के समक्ष भारतीय मुद्रा रुपये की विकास गाथा या कहें तो उसके कालक्रमिक विकास को तथ्यों के साथ प्रस्तुत करना है। जिससे सभी पाठक भारतीय इतिहास व वर्तमान भारत को मुद्रा के नजरिये से एक साथ देख सकें। आज देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में मुद्राशास्त्र को भी एक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। मुद्राशास्त्र पर आंग्ल भाषा में अनेक ग्रंथ व पुस्तकें उपलब्ध हैं, किन्तु हिन्दी में लिखी हुई इस विषय पर पुस्तक पाठक व विद्यार्थियों को सहज प्राप्त नहीं है। अतः विद्यार्र्थियों व पाठकों के हितार्थ सरल भाषा में इस पुस्तकों को तैयार करने का प्रयास किया गया है। आशा हे यह पुस्तक सभी के लिए उनपयोगी सिद्ध होगी।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392719493
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- All Age Groups
- Adults
