Bhartiya Patrakarita ka Vikas
Bhartiya Patrakarita ka Vikas
Virender Singh
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समाचार पत्रों ने भारत की प्रगति और समृद्धि में बाधक तत्वों का विरोध करना शुरू किया।
विचारकों और चिंतकों की कलम ने ज्ञान का नया प्रकाश जनसाधारण में फैलाने की चीज ताकि नई सामाजिक राजनीतिक चेतना के इस दौर में जब स्वर्णिम अतीत के आलोक में पीड़ित एवं दमित वर्तमान को जनता ने महसूस किया तो वह दर्द और दुख से करा उठी। इस दौरान ईसाई मिशनरियों ने साप्ताहिक, मासिक आदि पत्रों का प्रकाशन प्रारंभ कर दिया था। मिशनरी पत्रकारिता ने हालांकि प्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता को विशेष प्रभावित नहीं किया परंतु फिर भी सार्वजनिक जागरण की दिशा में इनकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। एंग्लो इंडियन पत्रकारिता भारतीय महत्वाकांक्षाओं का प्रतिबिंब नहीं बन सकती थी।
तत्कालीन भारत के कुछ प्रगतिशील चिंतकों ने भारतीय जनता को नेतृत्व प्रदान कर सही मार्ग का प्रशस्त करने का प्रयास किया। एंग्लो इंडियन पत्रकारिता भारत में पत्रकारिता के उद्भव के दिए आवश्यक उत्तरदायी रही है, तथा जिस संघर्ष का साहस इस समय के पत्रकारों ने दिखाया वह स्तुत्य है किंतु फिर भी भारतीय पत्रकारिता अपनी परिस्थितियों के अनुरूप अपनी धरती से जुड़कर भारतीय प्रवेश को आत्मसात करती हुई आगे बढ़ी तथा जन जन की आशाओं व आस्थाओं का केंद्र बने यह राजा राममोहन राय का ही सामर्थ था कि जब इसाई मिशनरियों ने भारतीय संस्कृति वैभव तथा विशिष्टता पर प्रहार करने शुरू किए तो उनकी इस सांप्रदायिकता का विरोध ब्रह्मा निकल मैगजीन के माध्यम से कर अपनी मौलिकता वह विशिष्टता को सुरक्षित रखने का प्रयास किया।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
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9789392677212
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
252
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 2 cm
Item Weight
Item Weight
505 grams
