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Bhartiya Rail Kal, Aaj Aur Kal

Bhartiya Rail Kal, Aaj Aur Kal

Vipin Jai

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16 अप्रैल, 1853 को 400 सवारियों के साथ शुरु हुआ रेल का पहला सफर आज विस्तार पाकर सारे देश की 'लाइफ लाइन' बन गया है। भारत भूमि पर रेल-गाड़ियों के परिचालन से पूर्व बैलगाड़ी, नाव, ऊंट, तांगा, घोड़े तथा पालकी ही परिवहन के मुख्य साधन थे। उनकी गति एवं आवागमन क्षमता बहुत धीमी तथा सीमित क्षेत्रों तक थी। रेलों की शुरुआत से परिवहन के क्षेत्र में क्रांति का सूत्रपात हुआ। रेल युग आने के साथ भारत का आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक परिदृश्य बहुत व्यापक रूप से बदला। विभिन्न दशकों में रेल नेटवर्क का विस्तार व विकास आज समस्त भारत में हो चुका है। आज रेलवे कश्मीर घाटी से कन्याकुमारी तथा सुदूर पूर्व पश्चिम तक अपने पैर फैलाये हुए है। भारतीय रेल जो विभिन्न भागों में बंटी हुई है आज भी जनसाधारण का एक विश्वनीय, सहज सुलभ तथा सस्ता आवागमन का साधन है। सवारी गाड़ियों के साथ-साथ माल गाड़ी परिवहन ने भारत के व्यापारिक तथा औद्योगिक उत्पादों को जन आवश्यकतों के द्वार तक पहुंचाया है। भौगोलिक रूप से रेल परिवहन देशव्यापी होने के साथ रोजी, शिक्षा, व्यापार, पर्यटन, तीर्थाटन की जरूरतों का एक विकल्पहीन साधन है। रेल यात्रा निरंतर गतिमान रही है। उसके कल, आज और कल की कड़ी को शब्दों में पिरोकर उसके विकास की 160 वर्षों से अधिक की तस्वीर आपके सम्मुख रखना इस पुस्तक का उद्देश्य है। भारतीय रेल के इतिहास की रोचक झलक इसमें क्रमवार प्रस्तुत की गयी है।

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Regular price INR. 520
Regular price INR. 650 Sale price INR. 520
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789391859855

Binding

Hard Cover

Age Group

  • All Age Groups
  • Adults

No. of pages

160

Book Dimension

22.5 cm x 15 cm x 1.6 cm

Item Weight

450 grams

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