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Bhartiya Sainya Regimenton Ki Parampara Aur Ithias

Bhartiya Sainya Regimenton Ki Parampara Aur Ithias

R. P. Singh

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10 जून, 1897 को एक छोटे सैन्य संगठन पर घात लगाकर कबाइलियों ने आक्रमण कर दिया। ब्रिटिश सेना ने तुरंत आर्टिलरी की सहायता से सामना किया। इस लड़ाई में मुख्य हाथ मुल्लाओं का था जिनका कहना था कि ब्रिटिश गोली पत्थर में बदल जाएगी और उनकी गोली पानी में जाकर गिरेगी। किसी को कोई हानि नहीं होगी, अतः अपने धर्म की सुरक्षा के लिए 'जेहाद' करो। इसके लिए संगठित होकर ब्रिटिश को इस क्षेत्र से बाहर करो। स्वात घाटी के 'मलाकंद' पर बड़ा आक्रमण होना षड्यंत्र का एक हिस्सा था। कुछ समय तक आपत्तियों के साथ अफवाह फैलाई जाती रही। कुछ लोगों ने इस समाचार पर चिंता प्रकट की। जब योग्य व्यक्ति बहादुरी के साथ अपने कर्तव्य का पालन करता है, यह केवल उसी के लिए सम्मान की बात नहीं है बल्कि सरकार भी गौरवान्वित होती है और उसकी निष्ठा को देखते हुए उन्हें गैलेंट्री अवार्ड की घोषणा करती है। 36th सिख के सैनिकों को आर्डर ऑफ मेरिट उनके गैलेंट्री एक्शन के परिणामस्वरूप प्रदान करती है।

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Hard Cover

Author

R. P. Singh

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