Bhartiya Sanskriti Aur Vigyan
Bhartiya Sanskriti Aur Vigyan
Rama Sayal
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जैसे-जैसे समय बदला, सुविधाएँ आई, लोग आधुनिक हुए और अपनी सभ्यता संस्कृतियों के बारे में भूलते चले गए। परिणामस्वरूप कोरोना जैसी महामारी ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया। पश्चिमी देशों के साथ-साथ भारत में भी इसका अधिक प्रभाव देखा गया है। दुनियाभर के वैज्ञानिक, डॉक्टर, शोध कर्ता आदि इसके इलाज हेतु वैक्सीन की खोज कर रहे हैं। अब इनका झुकाव भारतीय संस्कृति/परम्पराओं की ओर भी हो रहा है। भारतीय परम्पराओं के पीछे पूरा विज्ञान है। एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा है कि आज पूरे विश्व को मानना पड़ेगा कि 'हिन्दुधर्म' ही विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो 'विज्ञान पर आधारित है।' संस्कृति के इस पहलू को जानने की जिज्ञासा प्रारम्भ से आज तक सभी को रही है। हमारे ऋषि-मुनि अपने कठिन तप एवं साधना के द्वारा धार्मिक कृत्यों एवं इससे सम्बद्ध मांगलिक चिन्हों के रूप रंग, प्रकार एवं अर्थ को मानव जीवन हेतु कल्याणकारी ऊर्जा के स्त्रोत और प्रतीक के रूप में प्रदान किये गए हैं। उनको पहले से ही ऐसा आभास था कि भविष्य में हर कोई प्राणी अपने घर, परिवार, आजीविका के चक्कर में लम्बे और जटिल पूजा, आराधना, जप एवं सिद्धि से दूर हो जायेगा। इसलिए हमारे पूर्वजों ने मांगलिक चिन्हों को धार्मिक क्रिया-कलाप एवं नारायण के रूप के लिए प्रयोग करने का परामर्श दिया।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392679056
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- All Age Groups
- Adults
