Bhartiya Sena Ka Gouravshali Itihas (3 Vol. set)
Bhartiya Sena Ka Gouravshali Itihas (3 Vol. set)
Rampal Singh
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हिंदी सरकारी उपयोग के साथ-साथ जन-जन के व्यवहार की भाषा बने, इसके लिए आवश्यक है कि हम अपने समस्त पत्राचार औपचारिक-अनौपचारिक, आमंत्रण-निमंत्रण, आवेदन-प्रतिवेदन, सूचना-प्रपत्र आदि में सर्वत्र हिंदी और देवनागरी लिपि के प्रयोग का संकल्प लें। जब से हिंदी आम बोलचाल की भाषा में लिखी जाने लगी है और उसके इस स्वरूप को मान्यता मिलनी शुरू हुई है, लोग बेझिझक इस भाषा से जुड़े हैं। शुद्धतावाद के कारण कोई भी चीज सिमट कर रह जाती है, अगर आम लोगों के मन के मुताबिक सहज संप्रेषणीय भाषा का कोई नया स्वरूप बनता है और उसे स्वीकृति मिलती है तो उस भाषा की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ता है। आजादी के 67 वर्ष बाद भी भारतीय सेना की भाषा हिंदी न होकर अंग्रेजी है। भारतीय सैन्य इतिहास, युद्ध आदि अंग्रेजी भाषा में लिखे गए जो जनमानस की पहुँच से काफी दूर हैं। लेखक ने इस पुस्तक में हिंदी का प्रयोग कर लिखने का साहस जुटाया है क्योंकि सभी सैनिक अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं रखते हैं, वे अपनी मातृभाषा में निपुण हैं। अंग्रेजी भाषा में लिखा गया सैन्य इतिहास केवल अधिकारियों की जानकारी तक ही सिमट कर रह गया है।
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Rampal Singh


