Bhartiya Sena Ka Itihas
Bhartiya Sena Ka Itihas
Rampal Singh
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सन् 1925 में चीफ ऑफ स्टाफ जनरल सर एंड्रयू स्कीन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया, इसमें कुछ असैनिक सदस्य भी थे जिनमें पं. मोतीलाल नेहरू और मो. अली जिन्ना प्रमुख थे। कमेटी ने सैंड हर्स्ट में रिक्तियों की संख्या में प्रति वर्ष 10 सत 20 प्रतिशत तक वृद्धि किए जाने और सन् 1930 तक 100 कैडेटों की क्षमता वाले एक भारतीय सैंड हर्स्ट की स्थापना की संस्तुति की। तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए प्रतिवर्ष 33 कैडेटों को लिया जाना था। प्रारम्भ में सरकार ने इस संस्तुति को मानने से इंकार कर दिया, परन्तु सरकार पर दबाव बढ़ता गया और अन्ततः एक अक्टूबर सन् 1932 को देहरादून में रेलवे स्टाफ कॉलेज के पुराने भवन में एक इंडियन मिलिट्री एकेडमी की स्थापना की। 10 दिसम्बर, सन् 1932 को एकेडमी के औपचारिक उद्घाटन समारोह में तत्कालीन कमांडर-इन-चीफ मार्शल चेटवुड ने अपने सम्बोधन में तीन सिद्धांत प्रस्तुत किए जो किसी राष्ट्रीय सेना के लिए मार्ग दर्शन के रूप में आवश्यक माने गए। उनके ये सिद्धान्त हैं-पहला देश का हित, उसकी सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि। दूसरा जिसकी कमान आपको सौंपी गई है, उनकी सुविधा, सम्मान और कल्याण की बात दूसरे स्थान पर आती है। तीसरा आपकी अपनी सुविधा सुरक्षा की बात हमेशा अन्त में आती है। ये सिद्धान्त आज भी भारतीय सैन्य अधिकारियों के मार्ग-दर्शक सिद्धान्त के रूप में माने जाते रहे हैं।
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Rampal Singh
