Bhartiya Veerangnaon ki Shaurya Gatha
Bhartiya Veerangnaon ki Shaurya Gatha
R. P. Singh
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प्रथम विश्वयुद्ध में भारत की फौज अंग्रेजों की मदद के लिए इंग्लैंड पहुँची। रास्ते में फ्रांस के बंदरगाह पर जहाज रुका। सैनिक बाजार घूमने के लिए चले गए। वहाँ मैडम भीकाजी कामा उनकी प्रतीक्षा कर रही थीं, सभी भारतीय सैनिकों को अभिवादन कर उनका हाल-चाल पूछा और उन्हें प्रभावशाली भाषा में समझाना शुरू किया।
"मेरे वीर बच्चो ! तुम उस देश की तरफ से लड़ने जा रहे हो जिसने हमारी भारत माता को कैद कर रखा है। यदि अंग्रेजों की तरफ से लड़ोगे तो भारत माता के बंधन और दृढ़ होते चले जाएँगे।
याद रखो यह युद्ध हमारा नहीं है, तुम्हें धोखे में रखा जा रहा है, तुम्हें मरने के लिए मोर्चे पर भेजा जा रहा है। अपनी मातृभूमि को गुलाम बनाने वालों की ओर मत लड़ो।
" आजाद हिन्द फौज में तीन लाख सैनिकों में पचास हजार महिलाएँ थीं। सन् 1757 से सन् 1947 तक भारतीय नारी ने आवश्यकता पड़ने पर तन, मन और धन से सहयोग दिया।
आजादी के बाद देश ने पड़ोसी देश से जो युद्ध लड़ा, उसमें भी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से योगदान को नकारा नहीं जा सकता। देश को गुलाम बनाने का षड्यंत्र 17वीं शताब्दी से ही शुरू हो गया था।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9788198778161
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
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- Adults
