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Bukhari

Bukhari

Shyamal Bhattacharya

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यह उपन्यास जम्मू कश्मीर के उत्तरी भाग में सियाचेन ग्लेशियर की पृष्ठभूमि को सन् 1984 से चल रहे अषोषित युद्ध के आधार पर लिखा गया है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण ही हर रोज दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र में माइनस चालीस-पचास डिग्री तापमान में चल रहे इस युद्ध में सबसे ज्यादा मौतें होती है। इस भयानक परिस्थिीत में हरेक सैनिक के लिए सबसे बड़ी आकांक्षा होती है, थोड़ी-सी उष्मा। इस उष्मा को पाने के लिए वह अलग-अलग प्राकृतिक और अप्राकृतिक, घातक व आत्मघाती रास्ता अपनाता है। स्वप्न और दुःस्वप्न के बीच उसकी ज़िन्दगी और मौत झूलती रहती है। जहाँ देशप्रेम और पेट के लिए नौकरी जैसी भावनात्मक बातें हरेक के लिए अलग-अलग संदर्भ खड़ा कर देती हैं। यह कथा वैसे संदर्भों के आधार पर बांगला भाषा में रची गई है। जिसका हिंदी अनुवाद रूपाली मजूमदार ने अति उत्तम ढंग से किया है। लगता ही नहीं कि यह अनुवाद है।

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Binding

Hard Cover

Author

Shyamal Bhattacharya

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