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Chinti Ki Chappal

Chinti Ki Chappal

Dr. Shobha Agarwal

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आज हर जगह पक्की जमीनें बन रही हैं। मिट्टी की जमीनें होने के कारण कीड़े-मकोड़ों जैसे चींटी आदि को चलने में कष्ट होता है। कीड़े-मकोड़े मिट्टी की जमीन खोद कर उसमें अपना घर बना लेते थे। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती थी। इस पुस्तक में पर्यावरण समस्याओं के कारण निवारण का छोटे-छोटे नाटकों के माध्यम से, मूल्यसंप्रेष्य प्रस्तुतीकरण किया गया है। सामाजिक चेतना के प्रति जागरुक करते भी छोटे-छोटे नाटक हैं। सामान्य स्वास्थ्य और मानसिक चेतना को समृद्ध करते हुए भी कुछ नाटक हैं। हर नाटक की अपनी एक रीढ़ है अपना एक मूल्य है।

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Hard Cover

Author

Dr. Shobha Agarwal

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