Corona Vaishvik Sambandhon Par Prabhav
Corona Vaishvik Sambandhon Par Prabhav
Sanchita SinghV.S.Baghel
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आज कोरोना के कहर से सम्पूर्ण विश्व त्राहि-त्राहि कर रहा है। यह एक अभूतपूर्व संकट है क्योंकि इससे पहले किसी भी महामारी ने एक साथ दुनिया के इतने बड़े भूभाग को त्रस्त नहीं किया है जितना कोरोना ने। भारत भी इससे अछूता नहीं है। अब तक विश्व के लगभग 210 देश कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं, करीब 60 लाख इससे संक्रमित हो चुके हैं और 3.5 लाख से अधिक काल का ग्रास बन चुके हैं। चार माह से अधिक हो चुके हैं परन्तु अभी तक यह पता नहीं है कि यह संकट कब समाप्त होगा और अभी कितने और लोगों की जान लेगा। अभी तक न तो इसका कोई सटीक उपचार है और न ही इससे बचने का टीका या वैक्सीन ।
विश्व के सर्वाधिक विकसित, समृद्ध और महाशक्ति संपन्न राष्ट्र भी आज इस संकट के सामने घुटने टेके दिखाई दे रहे हैं। एक बात तो स्पष्ट है कि उच्च जी.डी.पी. और आयुधों के अकूत भण्डार की शक्ति से कोई राष्ट्र बड़ा नहीं हो सकता। कोरोना की मार सब पर पड़ी है और आज के विकसित राष्ट्र कोरोना के प्रकोप को रोकने में नाकाम रहे हैं। विज्ञान और तकनीक की संयुक्त शक्ति भी एक सूक्ष्म वायरस के प्रकोप को रोकने में असमर्थ है।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392690044
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
