Skip to product information
1 of 1

Dalit-Sangharsh

Dalit-Sangharsh

Dr. Pavitra Kumar Sharma

SKU:

‘दलित’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘दलन’ शब्द से हुई है। दलन का अभिप्राय है किसी वस्तु के मूल स्वरूप को दबाकर, क्षतिग्रस्त या नष्ट-भ्रष्ट कर दिया जाए, जैसे कि चक्की के दो पाटों के बीच डालकर अनाज के दानों को दल दिया जाता है। इस संदर्भ में दलित का अभिप्राय उस व्यक्ति समूह से है, जिसे समाज के धार्मिक,आर्थिक एवं राजनीतिक ढ़ाँचे में पोषक सत्ताधारियों द्वारा शोषण की चक्की में डाल दिया जाता है तथा शोषण एवं उत्पीड़न का शिकार बनाया जाता है।

आदमी अछूत या नीच जाति से नहीं बल्कि अपने स्वभाव और कर्म से बनता है। नीच वे लोग हैं जो दुष्ट प्रकृति के हैं, जो दूसरों का दिल दुखाते तथा गरीब मासूमों पर जुल्म ढ़हाते हैं। पाप कर्म करने वालों को दुष्कर्म करने वालों को नीच या अधम समझना चाहिए, न कि जाति से पैदा हुए निम्न कुल के उन गरीब लोगों को जो कोमल, मासूम तथा सरल ह्रदय वाले हैं तथा कभी किसी पापकर्म में लिप्त नहीं हैं।

ऋषि वालमीकि भले ही निम्न कुल में पैदा हुए थे लेकिन उन्हें कोई ‘अछूत’ या ‘नीच’ नहीं कहता । कारण यह है कि आदमी की महानता को कठोर-से-कठोर समाज नज़र अंदाज नहीं कर सकता। ऋषि वालमीकि आज सारे भारतीय समाज में महर्षि और आध्यात्मिक ज्ञान के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने क्षत्रिय कुल में पैदा हुए सीता जी के लव-कुश नामक बालकों का पोषण किया था। उन्होंने सवर्ण कुल के बालकों को अस्त्र-शस्त्र तथा वेद शास्त्रों आदि की शिक्षा भी दी थी।

वालमिकी मुनि शूद्र कुल में उत्पन्न होकर भी लव-कुश और उनके क्षत्रिय पिता श्री रामचंद्र जी के आदर्श थे। जनकनंदिनी सीता जी के पितातुल्य थे। पुस्तक में ‘दलित संघर्ष’ की व्याख्या बहुत सरल एवं सहज भाषा शैली में की गई है।

Quantity
Regular price INR. 316
Regular price INR. 395 Sale price INR. 316
Sale Sold out
Shipping calculated at checkout.

Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392680472

Binding

Hard Cover

Age Group

  • All Age Groups

No. of pages

Book Dimension

Item Weight

View full details