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Dard Diya Hai

Dard Diya Hai

Gopal Das Neeraj

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सुख आदमी को कैसे सीमित करता है और दुःख उसे कैसे विस्तृत करता है इस बात को नीरज जी ने इस प्रकार व्यक्त किया है-"मैंने चाहा बहुत कि अपने घर में रहूँ अकेला पर, सुख ने दरवाजा बन्द किया, दुख ने दरवाजा खोल दिया" 'दर्द दिया है' प्रेम में मिले विरह, वेदना और एकाकीपन को व्यक्त करने वाली एक मार्मिक रचना है। यह कविता प्रेम के सुखद पलों के बजाय उसके कारण उत्पन्न दर्द को स्वीकार करती है, जहाँ प्रियतम की यादें जीवन को जीने का सहारा बनती हैं। इनमें प्रेम के समर्पण और दर्द में भी सुन्दरता खोजने का भाव है। पुस्तक में ऐसी ही अन्य कविताएं भी हैं, रुबाइयाँ, मुक्त और गीत भी हैं। अंग्रेजी में Life and Death, Rise up! Rise up! O love-incarnate-glory of Everest & The Trial का विवेचन भी है।

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Regular price INR. 396
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789395960366

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
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