Darshnik Aristotle
Darshnik Aristotle
Vimla Devi
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मानव सभी प्राणियों में सबसे अच्छा है लेकिन जब वह कानून एवं न्याय का पालन नहीं करता तब वह खराब हो जाता है। शक्ति से किया गया अन्याय सबसे खतरनाक हो जाता है। जब वह पैदा होता है उसके पास नैतिकता भी होती है जिनका प्रयोग वह गलत कामों के लिए करता है। यदि वह धार्मपरायण नहीं है तो वह अपवित्र है तथा बहुत ही निर्दयी प्राणी है, लालची व व्यभिचारी है लेकिन न्याय उसको बाँधा कर रखता है।
न्याय का प्रशासन ही निर्णय करता है कि ठीक क्या है? यही राजनीतिक समाज का नियम है। अरस्तू का कहना है कि व्यावहारिक ज्ञान विशेषज्ञ के ज्ञान से भिन्न होता है। दार्शनिक राजा गणित, ज्योतिष, नक्षत्र विद्या, तर्क शास्त्र, द्वंद्वात्मकता तथा दर्शन का प्रकांड पंडित होता है। जबकि प्रशासन के लिए केवल इन्हीं विषयों का ज्ञान आवश्यक नहीं है। शासन प्रबंधा के लिए, दार्शनिक राजा को वित्त, विधि, इतिहास और अर्थशास्त्र जैसे विषयों का भी ज्ञान रखना चाहिए।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
978-93-92719-23-3
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
