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Darshnik Sukrat

Darshnik Sukrat

Kavita Choudhary Vimla Devi

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सुकरात के दर्शन के आधार बिन्दु सद्गुण ही ज्ञान है, अच्छाई का अर्थ है विवेक, शासन एक कला है, लोकतंत्र अज्ञानियों का शासक है। सभी राजनीतिज्ञों में शासन करने की क्षमता नहीं होती, पूर्ण शिक्षित ज्ञानी और गुणी व्यक्ति ही शासन तंत्र का सफल संचालन कर सकता है।

सुकरात परलोक का बहुत ब्यौरेवार वर्णन करते हैं। उनमें इस प्रकार की बातें आती हैं कि कितनी नदियाँ और फाटक कब-कैसे पार करने पड़ते हैं।

वर्तमान युग में कानून द्वारा घोषित किया गया अपराधी अदालत से कानून के रखवालों के समक्ष हथकड़ी पहने, भागने में सफल हो जाता है जैसा कि भारत में आए दिन घटना देखने को मिलती है परंतु सुकरात को उसके मित्रों ने जेल से भागने में सहायता करने के अनेक तरीके सुझाए परंतु उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया और अदालत के समक्ष अपने विचारों को साहस के साथ प्रकट किया और जेल से भागना अस्वीकार किया। सुकरात ने अपनी मृत्यु के द्वारा यह सत्य हमेशा के लिए स्थापित कर दिया कि मृत्यु सत्य का गला नहीं घोट सकती।

सुकरात का मुकदमा लोकतांत्रिक एथेन्स में एक उदाहरण बना। एथेन्स में लोकतंत्र था। एथेन्स के लोकतंत्र में गुलामों को किसी प्रकार के मतदान का अधिकार नहीं था जबकि उन दिनों एथेन्स में दासों की संख्या अधिक थी। पुस्तक में सुकरात के ज्ञान और उसकी मृत्यु की कहानी का विस्तार से वर्णन किया गया है।

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Regular price INR. 396
Regular price INR. 495 Sale price INR. 396
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

978-93-92715-06-8

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
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