Dharamraj Yudhishthir
Dharamraj Yudhishthir
Vanshidhar Chaturvedi
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महाभारत की महान गाथा में महाराज युधिष्ठिर प्रमुख पात्रों में से हैं। उनके जीवन का वृत्तांत वास्तव में एक ऐसे सम्राट का है जो शस्त्र और शक्ति के बल पर नहीं वरन् अपनी लोकप्रियता, सत्य तथा धर्मपालन की योग्यता के आधार पर भी है। कहा जा सकता है कि महाराज युधिष्ठिर उस समय ऐसे जननायक थे जो आम जन के हृदय सम्राट थे। इसका यही कारण है कि उनके राज्य में कोई अभाव, अन्याय या विषमता का लेश भी नहीं था। इसके अतिरिक्त अनेक लौकिक-अलौकिक शक्तियों, उपलब्धियों को अर्जित करने वाले युधिष्ठिर में अभिमान छू नहीं सका था। हर स्थिति में विनम्रता तथा शिष्टता उनके व्यक्तित्व का विशिष्ट पक्ष था। इसीलिए वे कौरवों विशेष कर दुर्योधन के लिए ईर्ष्या के पात्र बनते गए। इतने पर भी महाराज युधिष्ठिर के मन में दुर्योधन सहित कौरवों के प्रति सद्भावना ही थी।
युधिष्ठिर के चरित का विस्तृत स्वरूप उपन्यास के कुछ ही पन्नों में समेट पाना दुष्कर कार्य है तथापि जितना भी संभव हो सका उसका पूरा प्रयास किया गया है। यह दावा नहीं करते कि युधिष्ठिर का सांगोपांग उल्लेख इस उपन्यास में है परन्तु यह अवश्य कहा जा सकता है कि यथासंभव महाराज युधिष्ठिर के जीवन और अन्तर्द्वन्द्वों को इस उपन्यास में उकेरने की चेष्टा की गई है। आशा है पाठकों को यह उपन्यास मेरे पहले उपन्यासों की तरह पसन्द आएगा।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
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9789392608803
Binding
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Hard Cover
Age Group
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- All Age Groups
