Dilchasp Dilli
Dilchasp Dilli
Dinesh Singh
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कहते हैं दिल्ली कई बार बसी और उजड़ी। यह भी माना जाता है महाभारत काल में पांडवों को बंटवारे में जो खांडवप्रस्थ मिला था वह यही था। तब यहाँ केवल जंगल था। पांडवों ने अपना पसीना बहाकर इसे इंद्रप्रस्थ नाम दिया। इसे अपनी राजधानी बनाया। यहां से अपने राज्य का विस्तार किया। दिल्ली का पुराना किला उनके समय का गवाह है। कहते तो यह भी हैं कि महाभारत युद्ध का बीज भी यहीं पड़ा। न दुर्योधन ने समतल भूमि को ताल समझकर अपने वस्त्र ऊपर उठाए होते. न ताल को समतल भूमि समझकर पानी में भीगा होता, न पांचाली को यह नजारा देखकर उसपर हंसी आई होती, न दुर्योधन ने पांचाली को सबक सिखाने की ठानी होती। दिल्ली जाने कितने अजूबों, किस्सों की जननी रही है। कभी यहाँ बहने वाली यमुना नदी में घड़ियाल हुआ करते थे आज घड़ियाली आँसू बहाने में निपुण नेता हुआ करते हैं। बहरहाल, इस पुस्तक में आपको दिल्ली के यत्किंचित रोचक किस्सों से रूब-रू होने का भरपूर अवसर मिलेगा।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392608766
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
