Drone
Drone
Sanchita Kushwah
SKU:
आर्मेनिया-अजरबैजान की लड़ाई में इस्तेमाल हुई ड्रोन तकनीक अब पाकिस्तान के जरिए जम्मू-कश्मीर तक पहुंच गई है। पड़ोसी देश पाकिस्तान की जमीन पर ऐसे बहुत से ड्रोन्स आ चुके हैं। चूंकि चीन ऐसे ड्रोन बनाने का मास्टर है तो पाकिस्तान के लिए इनकी उपलब्धता बहुत आसान है। आतंकवादी ड्रोन्स के जरिए बायोलॉजिकल या केमिकल एजेंट्स भी डिलिवर कर सकते हैं। सवाल यह है कि फोटोग्राफी और निगरानी के लिए बनाए गए ड्रोन्स का आतंक के लिए इस्तेमाल कैसे और कब शुरू हुआ ? क्यों पूरी दुनिया को ड्रोन वारफेयर से खतरा है ? 1990 के दशक में अमेरिका ड्रोन्स का इस्तेमाल मिलिट्री सर्विलांस के लिए करता था। हाल के दिनों में ड्रोन्स के उपयोग का दायरा बढ़ा है। अब फिल्मों की शूटिंग से लेकर फोटोग्राफी, सामान की डिलिवरी से लेकर काफी सारी चीजों में होने लगा है। कॉमर्शियल ड्रोन्स साइज में छोटे होते हैं। यह काफी सुविधाजनक होते हैं। इसमें ज्यादा शोर नहीं होता है। अपनी इन्हीं खूबियों के कारण यह आतंकियों को भी खूब भा रहे हैं। यह आसानी से आसमान में डेढ़-दो घंटे उड़ान भर सकते हैं। ये ड्रोन अपने साथ 4-5 किलोग्राम का वजन ले जा सकते हैं। इन ड्रोन्स को रडार के जरिए ट्रेस और ट्रैक कर पाना मुश्किल है। ऐसे में आतंकी इन ड्रोन्स के जरिए आसानी से हमला कर सकते हैं।
Couldn't load pickup availability
Share
Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392602375
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
Book Dimension
Book Dimension
Item Weight
Item Weight
