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Faltu Log

Faltu Log

S.Saki

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मेरे मन में आ रहा है कि वृद्धाश्रम में रह रहे साथियों को छोड़ मैं उन लोगों के बारे में, उनके बेटा-बहुओं के बारे में क्यों न लिखूँ जो इन्हें फालतू समझ कर रात के अँधेरे में वृद्धाश्रम में आकर चुपचाप छोड़ जाते हैं। यहाँ तक कि लौट कर फिर उनकी खबर नहीं लेते। बस फिर क्या, मैं पेन और कापी उठाकर ऐसा करने के लिए तैयार हो गया। तीन-चार दिनों बाद मैं अपने कमरे से बाहर निकला। मैं वापस आकर उस बेंच पर बैठ गया, जहाँ से वृद्ध आश्रम के मेन गेट के पास गोरखा चौकीदार स्टूल पर बैठा दिखाई दे रहा था। सूरज डूबने वाला है। उसकी लालिमा चारों तरफ फैल रही है। सारा आकाश रंगीन होता जा रहा है। कुछ ही देर बाद वृद्ध आश्रम के कमरे, उसकी इमारत और उसका चौतरफा सूरज की मद्धम पड़ती जा रही रोशनी में एक परछाईं की तरह लगने लगता है। सामने एक पेड़ के नीचे बेंच पर बैठा गुरमेल ऊँची आवाज़ में बैराग-भरा शबद गाने लगता है। वृद्ध आश्रम में घटी दुःखदायी घटना के कारण आज वह फिर बेचैन-सा है। वह फिर कष्ट में है, तकलीफ में है। उसकी आवाज़ में एक दर्द है, दुःख है, आँसू भरे हुए हैं। ऐसे असहाय वृद्धों के जीवन की घटनाओं पर आधारित यह उपन्यास अत्यंत ही सरल और रोचक भाषा-शैली में लिखा गया है। जोकि अत्यंत ही मार्मिक है और आशा है जो बेटे-बहुएँ ऐसे दुःखद कार्य करते हैं उनको इससे प्रेरणा मिलेगी।

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Regular price INR. 476
Regular price INR. 595 Sale price INR. 476
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392729195

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
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