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Galwan ke Balwan

Galwan ke Balwan

Rampal Singh

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सितंबर 2011 के पहले सप्ताह में चीनी सेना के लद्दाख के क्षेत्र में घुसपैठ कर माउंट ग्या के पास पत्थरों पर लाल रंग से चीनी भाषा में चीन लिख दिया। यह स्थान सीमा से 11.5 कि. मी. से 1.7 कि. मी. के बीच है। 4 जून, 2011 को चीनी हेलीकॉप्टर भारतीय सीमा में घुस आए थे। सन् 2007 में चीनी सेना ने 140 बार तथा सन् 2008 में 270 बार घुसपैठ की। एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हजारों वर्षों से अस्तित्व में रहे तिब्बत को हड़पने के बाद माओ-त्से-तुंग ने कहा था कि तिब्बत चीन की हथेली है, इसकी पाँच उँगलियाँ हैं नेफा, अरुणाचल, भूटान, नेपाल, सिक्किम व लद्दाख । इसलिए इन पाँचों उँगलियों को कब्जे में लेने के लिए जनमुक्ति सेना द्वारा एक दीर्घकालिक रणनीति का यह हिस्सा है। सन् 1962 में ही चीनी सेना ने लद्दाख इलाके में हजारों वर्गमील भूमि हड़प ली थी। इसके बाद पाकिस्तान ने हजार वर्ग मील भूमि चीन को उपहार स्वरूप प्रदान की। संपूर्ण लद्दाख पर चीनी गिद्ध दृष्टि लगी हुई है। इस कारण वह यहाँ बार-बार घुसपैठ कर रहा है। 15 जून, 2020 को गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प का जिक्र करते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि इस संघर्ष में कर्नल संतोष बाबू और अन्य 19 भारतीय जवानों ने अपने प्राण न्यौछावर किए लेकिन उन्होंने चीन के सैनिकों को ठीक जवाब दिया। इस खूनी संघर्ष के लिए चीन ने ही हालात बनाए जिसका उसे भी खमियाजा भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस सदन को अपने जवानों पर गर्व है। हमारे जवानों ने हमेशा चुनौतियों का डट कर सामना किया और देश का गौरव बढ़ाया।

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Regular price INR. 636
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392602221

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults

No. of pages

248

Book Dimension

22.5 cm x 15 cm x 1.8 cm

Item Weight

490 grams

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