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Geet Govind

Geet Govind

Jai Dev

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'गीतगोविन्द' संस्कृत की प्रसिद्ध काव्यकृति 'गीतगोविन्दम्' का अनुवाद मात्र नहीं, उसका रूपान्तर है। जिस प्रकार कोई कंगन को गढ़कर आरसी में परिवर्तित कर दे और उस आरसी को किसी रमणी के हाथ की अँगुली के परिमाण के अनुसार रच ले, उसी प्रकार यह मूल संस्कृत गीतगोविन्दम् की भाव सामग्री को ग्रहण कर हिन्दी भाषा की प्रकृति और हिन्दी काव्य की आधुनिक प्रवृत्ति के अनुरूप रची गई है। यह प्रकृति और प्रवृत्ति मूल संस्कृत की प्रकृति और प्रवृत्ति से अभिन्न होती हुई भी कुछ अंशों में भिन्न है, दार्शनिक शब्दों में हिन्दी-संस्कृत का भेदाभेद 'तादात्म्य सम्बन्ध' है।

यदि रूपान्तर का अभिप्राय अक्षरार्थ अनुवाद समझकर यह पुस्तक लिखी जाती तो जो सेवा इस पुस्तक द्वारा भारतीय संस्कृति की उद्दीष्ट थी उसका शतांश भी सम्भव न हो पाता। इस हिन्दी रूपान्तरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि प्राचीन भारत की सर्वोत्तम गीतात्मक प्रवृत्ति किसी तात्त्विक रूप से विद्यमान है, किसी रूप में फिर से लोकजीवन का अंग बन सके और प्राचीन तथा अर्वाचीन संस्कृतियों का एक सुन्दर संगम चरितार्थ हा सके। हिन्दी रूपान्तरकार ने मूल कृति का शब्दशः अनुवाद न कर आपने उद्देश्य को भली भाँति साधित किया है।

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Regular price INR. 396
Regular price INR. 495 Sale price INR. 396
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Product Details

Language

ISBN

9789395960427

Binding

Hard Cover

Age Group

  • All Age Groups

No. of pages

164

Book Dimension

22.5 cm x 15 cm x 1.6 cm

Item Weight

450 grams

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