Ghati Ko Grahan
Ghati Ko Grahan
Manoj Kumar
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'घाटी को ग्रहण' उपन्यास के पटल पर मिली-जुली संस्कृति की परिचायक कश्मीरियत के दर्शन होते हैं। इस उपन्यास में आजादी के समय से ही पड़ोसी मुल्क द्वारा कश्मीर को हथियाने की दूषित मनोवृत्ति को उजागर किया गया है। इसमें वर्ष 1947, 1962, 1965 एवं 1971 के युद्धों का काल्पनिक वर्णन सेना के अदम्य साहस से पाठक का परिचय कराता है। इस उपन्यास में राष्ट्र विरोधी एवं संप्रदाय विरोधी ताकतों द्वारा आवाम में मज़हबी घृणा और बैर के ज़हरीले बीज रोपित होते दर्शाया गया है। इसमें नब्बे के दशक के प्रारंभ में घाटी में बड़े पैमाने पर हुई हृदय-विदारक अराजकता एवं विस्थापन की पीड़ा को निटकता से दर्शाने का प्रयास किया गया है। यह उपन्यास शरणार्थी शिविरों में जीने-मरने को बाध्य इंसानों की मनोस्थिति का सूक्ष्मता से अध्ययन करते हुए उनके माध्यम से मानवीय मूल्यों को परखने का प्रयास करता है। प्रस्तुत उपन्यास घाटी पर लगे ग्रहण पर सवाल उठाता है तथा शांति और भाईचारे की खातिर वर्तमान दायित्व से निराश होकर भविष्य से जवाब पाने की आशा करता है।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789391859077
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
