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Gramin Lok-Kathayein

Gramin Lok-Kathayein

Shivnarayan Srivastava

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इस पुस्तक में जो कहानियाँ संकलित हैं। उनमें से अधिकांश लोक-कथाएं वह हैं जो लेखक ने अपने गाँव में लोगों से सुनी हैं। लेकिन इन कथाओं के कहने का ढ़ंग लेखक का अपना है, जो देहाती बोल-चाल से मिलता-जुलता है और लोक-कथाओं के लिए बहुत ही उपयुक्त हैं। आप देखेंगे कि उनमें लोककथा का रंग,आस्था और विश्वास, सत्य और न्याय की असत्य और दुष्टता पर विजय पूर्ण रूप से मौजूद है। यह इसलिए सम्भव हो सका कि लेखक मेहनतकश जनता के सम्पर्क में रहकर और उनके संघर्षों में भाग लेकर सदियों के अनुभव को और युग सत्य को आत्मसात कर लिया। जैसे-जैसे हमारी संस्कृति का विकास होगा और साक्षरता फैलेगी, सैकड़ों लेखक मेहनतकश जनता से उत्पन्न होंगे। उनका सोचने और बात करने का ढ़ंग मध्यमवर्गीय बुद्धिजीवियों से कैसे भिन्न होगा, लेखक की यह कहानियाँ इसका प्रमाण हैं। पुस्तक चित्रों से सुसज्जित है।

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Regular price INR. 316
Regular price INR. 395 Sale price INR. 316
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392729201

Binding

Hard Cover

Age Group

  • All Age Groups
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