Gramin Lok-Kathayein
Gramin Lok-Kathayein
Shivnarayan Srivastava
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इस पुस्तक में जो कहानियाँ संकलित हैं। उनमें से अधिकांश लोक-कथाएं वह हैं जो लेखक ने अपने गाँव में लोगों से सुनी हैं। लेकिन इन कथाओं के कहने का ढ़ंग लेखक का अपना है, जो देहाती बोल-चाल से मिलता-जुलता है और लोक-कथाओं के लिए बहुत ही उपयुक्त हैं। आप देखेंगे कि उनमें लोककथा का रंग,आस्था और विश्वास, सत्य और न्याय की असत्य और दुष्टता पर विजय पूर्ण रूप से मौजूद है। यह इसलिए सम्भव हो सका कि लेखक मेहनतकश जनता के सम्पर्क में रहकर और उनके संघर्षों में भाग लेकर सदियों के अनुभव को और युग सत्य को आत्मसात कर लिया। जैसे-जैसे हमारी संस्कृति का विकास होगा और साक्षरता फैलेगी, सैकड़ों लेखक मेहनतकश जनता से उत्पन्न होंगे। उनका सोचने और बात करने का ढ़ंग मध्यमवर्गीय बुद्धिजीवियों से कैसे भिन्न होगा, लेखक की यह कहानियाँ इसका प्रमाण हैं। पुस्तक चित्रों से सुसज्जित है।
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Binding
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Hard Cover
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Shivnarayan Srivastava
