Harad
Harad
R. Pandey
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हरड़ को माता के समान कल्याणकारी कहा गया है। माता एक बार कूपित हो सकती है लेकिन खाई गई हरड़ शरीर में किसी प्रकार का विकार उत्पन्न न कर लाभ ही पहुँचाती है। हरड़ लगभग सभी रोगों की औषधियों में प्रयोग की जाती है और घरेलू चिकित्सा में भी धड़ल्ले से इसका उपयोग होता है।
समस्त रोगों का नाश करने वाली हरड़ आज के प्रदूषित वातावरण में रहने वाले व्यक्तियों के लिए एक वरदान से कम नहीं है। संस्कृत के आचार्यों और ऋषि-महर्षियों ने हरड़ की मुक्तकंठ से प्रशंसा ही नहीं की है बल्कि औषधीय रूप में भी इसका विधिवत् प्रयोग किया है।
हरड़ एक दिव्य बूटी है, एक महारसायन है और जन-जन में एक अचूक औषधि के रूप में विख्यात है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जिस औषधि के साथ मिलाई जाती है इसके गुणों में और भी अधिक वृिद्ध हो जाती है और उसके गुणों को भी बढ़ा देती है। हरड़ अंगों को शिथिल होने से रोकती है। मोटापे को छांटती है। सब रोगों को शांत करने वाली, इंद्रियों को बल देने वाली, पुष्टिदायक, आयु को बढ़ाने वाली, कल्याणकारी हरड़ में आयु को स्थिर करने का परम गुण है। हरड़ का प्रयोग कैसे करें, यही सोचकर मैंने इसके औषधीय प्रयोग इस पुस्तक में बताए हैं।
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Language
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- HIN- Hindi
ISBN
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9789392713279
Binding
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Hard Cover
Age Group
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- All Age Groups
- Adults
No. of pages
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Book Dimension
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